Uttarakhand

उत्तराखण्ड

  • श्री लालकृष्ण आडवाणी ने ऋषिकेश में गंगा नदी से आशीष मांगा. इसी तरह गंगा से आशीर्वाद लेने के लिए कई प्रसिद्ध मशहूर हस्तियां ऋषिकेश में आते हैं. गंगा को पवित्र माना जाता है क्योंकि उसके पानी में आध्यात्मिक शक्तियां हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि गंगा में यह आध्यात्मिकता कहां से आती है ?

  • free flows of water in River Ganga

    Uttarakhand high court declared River Ganga as living entity. Ganga saving rights given to those personality, who have rights already. even they were unable to take perfect measures. Rights should be given to those people, who are actually working for Ganga. 

  • नदी के प्रदूषित होने की मुख्य वजह नदी में बहाव कम होना है . शुद्धता बहाव से आती है जैसे पतीले में रखा पानी एक सप्ताह बाद सड़ने लगता है जबकि फुहारे में नाचता पानी शुद्ध रहता है . यह बात नदियों की निर्मलता पर भी लागू होती है . नदी के पानी की स्वछता उसमे पल रहे प्राकृतिक जीव जन्तुओ से स्थापित होती है. इनमे मछली प्रमुख है. बराज बनाने से मछलियों पर दुष्प्रभाव पड़ता है. मछलियाँ अपने प्रजनन क्षेत्रों तक नहीं पहुँच पाती है .प्रजनन क्षेत्र पर नहीं पहुँचने से उन्हें अनुपयुक्त स्थानों पर अंडे देने होते हैं जिस से वे कमजोर होती हैं . आज बंगलादेश से आने वाली हिल्सा मछली फरक्का बराज को पार नहीं कर पाती हैं. पहले यह मछली इलाहाबाद तक पायी जाती थी . नरोरा, हरिद्वार तथा ऋषिकेश में बराज बनाने से महासीर की साइज भी छोटी होती जा रही है . ये जीव जंतु ही जल के प्रदुषण को खाकर नदी के जल को निर्मल बनाते हैं . अतः मछलियों से जल की गुणवत्ता को आंका जा सकता है. जिस नदी में मछलियों की श्रेष्ठ जातियां पाई जाती हैं उस नदी को स्वच्छ मानना चाहिए . मछलियाँ जल की गुणवत्ता को दर्शाती है उसी प्रकार जैसे गुलाब के फूल बगीचे के स्वास्थ्य को दर्शाता है . नीचे दी गई फोटो में आप स्पष्ट देख सकते हैं विष्णुप्रयाग में नदी की स्तिथि क्या है.

    आप देख सकते हैं की विष्णुप्रयाग परियोजना के नीचे नदी में पानी शून्य है .फोटो गंगा टुडे टीम 

    नदी के सूख जाने से मछलियाँ एवं अन्य जलीय जीव जंतु समाप्त हो जाते हैं. इस से नदी का पानी खराब हो जाता है . इसी वजह से कानपुर , बनारस, पटना और कोलकाता में गंगा का पानी खराब है . ठीक इसी तरह नरोरा बराज से पूरा पानी निकाल दिया जाता है जिस कारण गंगा लगभग सूख जाती है आप नीचे दी गई फोटो में देख सकते हैं . बराज के ऊपर पानी है. नीचे केवल एक छोटी धारा है.

    कई पर्यायवर्णीय रिपोर्ट और कोर्ट आदेशो के बावजूद सरकार नदी में पानी की पर्याप्त मात्र छोड़ने पर ध्यान नहीं दे रही है जो की चिंतनीय विषय है . यूपी हाईकोर्ट इलाहाबाद के ने आदेश दिए हैं की उत्तर प्रदेश में गंगा में 50%पानी छोड़ना अनिवार्य है. ( देखें आर्डर पैरा “c” पेज 3-4). दुसरे, जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है की गंगा में ऋषिकेश में औसतन 55 प्रतिशत पानी पर्यावरण के लिये छोड़ना चाहिए (देखेंMOWR रिपोर्ट ( पेज 30). इसीप्रकार यमुना नदी पर किये गए एक अध्ययन में कहा गया है की यमुना में पर्यावरण के लिए के लिए 50-60% पानी छोड़ना आवश्यक है .” इन तमाम रिपोर्टों के बावजूद सरकार द्वारा 50पानी नदी में छोड़ने को कदम नहीं उठाये जा रहे हैं.आज विद्युत परियोजनाओं और सिंचाई के लिए पानी निकाल लेने से गंगा में पानी की मात्रा नामात्र रह गई है जो गंगा के लिए संकट का विषय है . हम नीचे एक गंगा के बहते पानी के फोटो दे रहे हैं जब इस प्रकार गंगा में पर्याप्त पानी होगा तब ही गंगा प्रदुषण मुक्त हो सकती है .

    ऋषिकेश में गंगा 

    सरकार द्वारा प्रदूषण करने वाले होटलों को सील किया जा रहा है और उद्योगों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने को कहा जा रहा है जो स्वागत योग्य कदम है परन्तु वर्तमान में गंगा के प्रदूषित होने का कारण उसमे पानी का अभाव है जो की जल विद्युत परियोजना और सिंचाई के लिए पानी पूरी तरह निकाल लिया जाता है और गंगा सूख जाती है . श्री नरेन्द्र मोदी से विनातीपूर्ण आग्रह है की गंगा में 50% पानी छोड़ने की व्यवस्था करें तभी होटलों को सील करने एवं उद्योगों पर नकेल कसने की सार्थकता है बिना ऐसे किये गंगा शुद्ध नहीं हो सकती .


     

  • उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गंगा और यमुना नदियों को जीवित व्यक्ति घोषित कर दिया है. यह निर्णय 15 मार्च, 2017 को न्यूजीलैंड संसद द्वारा पारित एक विधेयक (वाँगनूई नदी) का हवाला देकर लिया गया.

  • नदियों पर बाँध बनाना विकास का सूचक माना जाता है. बाँध बनाकार नदी के जल को एक जलाशय में एकत्र करके उससे जलविद्युत बनायी जाती है और नहरें बनाकर सिंचाई के लिए खेतों को पानी उपलब्ध कराया जाता है. लेकिन प्रत्येक परियोजना के समाज एवं पर्यावरण पर कुछ दुष्प्रभाव पड़ते हैं जैसे :

  • केदारनाथ आपदा को आये चार साल बीत चुके हैं.लेकिन पहाड़ों का गुस्सा आज भी कम नहीं हुआ है क्योंकि सरकार ने ऐसी दुर्घटनाओ को दूर करने के लिए ठोस नीति नहीं बनाई है.भारत मौसम विभाग ने दावा किया था

  • चौरास बाँध श्रीनगर

    योजना आयोग ने अपनी एकीकृत ऊर्जा नीति रिपोर्ट में जल विद्युत् को ऊर्जा का सबसे बेहतर श्रोत माना है चूंकि यह कोयले से उत्पन्न ऊर्जा के मुकाबले गैस उत्सर्जन नहीं करता

  • टिहरी झील (फोटो साभार: विमल भाई)

    गंगा नदी की गुणवत्ता को बांधों का निर्माण ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयाग, काशी और गंगा सागर तक प्रभावित कर रहा है। सच है कि बांधों के निर्माण से बिजली की उपलब्धता बढ़ने से लाभ होगा। पर सवाल यह है कि क्या ये बांध नदी के पानी के मनोवैज्ञानिक गुणों की गिरावट का कारण बनती हैं। 

  • टिहरी बांध में डुबने के कारण वीरान हुए खेत (फोटो साभार गंगा टुडे टीम)

    पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन हो रहा है क्योंकि मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि करना मुश्किल है. जलविद्युत् परियोजनाओं के कारण कई समस्याए पैदा हो रही है जैसे

  • सिंगोली भटवारी पावर प्रोजेक्ट की आपदा में टूटी बराज (फोटो साभार: गंगाटुडे टीम)

    सिंगोली भटवारी पावर प्रोजेक्ट के अनुबंध को तीन साल बढाए जाने के बजाय इस परियोजना को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए.

  • उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इसी साल 20 मार्च को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए गंगा और जमुना नदियों को जीवित इंसान का दर्जा दिया था.

  • गंगा में स्नान करते श्रद्धालु (फोटो साभार: विकिमीडिया)

    राम नवमी के अवसर पर भक्तों ने गंगा नदी में पवित्र डुबकी लगाई लेकिन गंगा में डुबकी लगाने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है.

  • कृत्रिम भूजल रिचार्ज सिस्टम उत्तर-पश्चिम सैन फर्नांडो घाटी(फोटो साभार: L.A.Aqueduct Centennial)

    हाल ही में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस्राइल का दौरा किया. इस्राइल में पहले, पानी की भारी कमी थी लेकिन अब वे कृत्रिम भूमि जल रिचार्ज की प्रक्रिया का उपयोग कर रहे हैं, जिसके द्वारा उन्होंने मनुष्य उपयोगों के लिए पानी की उपलब्धता में वृद्धि की है।

  • हाल ही में NGT ने गंगा की सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला दिया है कि गंगा के तटों का सीमांकन किया जायेगा. इस फैसले के तहत NGT ने गंगा की सुरक्षा के तहत हर जिले में गंगा के तटों में 200 मीटर के दायरे में कोई भी निर्माण कार्य (पुल, भवन, खनन इत्यादि) नहीं होगा और 500 मीटर के दायरे में कोई भी प्रदुषण नहीं फैलाया जायेगा.

    नदी में बाड़ के दौरान नदी में जलमग्न भवन (फोटो साभार: गंगा टुडे टीम)
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     भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में उत्तरकाशी में विनाशकारी भूस्खलन (फोटो साभार: सुमित राणा)

    निरंतर बांधों के निर्माण के चलते सरकार ने भागीरथी नदी क्षेत्र को इको-सेंसिटिव क्षेत्र घोषित किया है. परियोजनाओं के निर्माण से बेरोजगारी की समस्या बढ़ने लगी है.

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    श्रीनगर गढ़वाल में निर्मित अलकनंदा जलविद्युत परियोजना (फोटो साभार: गंगा टुडे टीम)
    जब हमारे पास श्रीनगर परियोजना का उत्तम विकल्प मौजूद है तो जरुरी नहीं कि डैम बनाकर क्षेत्र को नुक्सान पहुचाया जाए
  • टिहरी डैम के पीछे झील में गाद का भराव (फोटो साभार: विमल भाई)
    टिहरी झील का गाद से भरने का औसत समय 130 से 171 वर्ष है, तो इस पयोजना से लम्बे समय का विकास कैसे संभव है?
  • बाह्य आक्रमण से जलविद्युत परियोजनाओं को खतरा (फोटो साभार: जीवन नेगी, विकिमीडिया)

     जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण से देश को अत्यधिक नुक्सान हैं.

  • गंगा जीर्णोधार मंत्रालय के नए मंत्री श्री नितिन गडकरी

     

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने माँ गंगा के पुनरुद्धार के लिए गंगा जीर्णोधार मंत्रालय की जिम्मेदारी उनके कर्मठ सहियोगी नितिन गडकरी को सौंपी है. देश को आशा है कि श्री गडकरी उसी तत्परता से गंगा की सफाई करेंगे  जिस तत्परता से उन्होंने देश में सड़कों का जाल बिछाया है.

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    गंगा संरक्षण के लिए हे...गढ़वाल विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के बीच MOUसाईंन किया गया (फोटो साभार: दीप जोशी, हिंदुस्तान टाइम्स)

     

    हाल ही में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की उपस्तिथि में गढ़वाल विश्वविद्यालय को गंगा की सफाई की जिम्मेदारी दी है.  गंगा को जीवित रखने की दृष्टि से सरकार का यह एक उत्तम निर्णय है.