लेख


गंगोत्री में स्थित माँ गंगा का मंदिर (फोटो साभार: जीएनयू डॉक्स.विकिमीडिया)

 

“His Holinesses welcomes the declaration of Government of India to name Holy Ganga as the National River” – By Jagadguru Sri Nischalanandji, Shankaracharya of Goverdhan Mutt,Puri

 गंगा नदी लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है जिसे कि हिन्दू धर्म में माता की संज्ञा दी गयी है. जगद्गुरु शंकराचार्य महाराज स्वरूपानंद जी ने गंगा के उल्लेख में कहा है कि:

“गौमुख से गंगा सागर तक गंगा की अविरल प्रवाह उसमे भौतिक, रासायनिक और जैविक गुण उत्पन्न करती है. अतः आज की सबसे बड़ी आवश्यकता गंगा को प्रवाहमान बनाये रखना, और उसके नैसर्गिक स्वरुप को बनाये रखने की है”

ब्रह्म्वेवेर्त्पुरण में निम्न श्लोक का जिक्र किया गया है

अर्थात:- भारतवर्ष में मनुष्यों द्वारा उपार्जित करोड़ों जन्मो के पाप गंगा के वायु के स्पर्शमात्र से नष्टहो जाते हैं. देवी (गंगा) के दर्शन की तुलना में स्पर्श करने में दस गुना अधिक पूण्यप्राप्त होता है. सामान्य दिनों में भी मौसल (गंगा में निश्छल होकर) स्नान से मनुष्यों के करोड़ो जन्मो के पाप नष्ट होते हैं. अनेकों जन्मों में अर्जित ब्रह्महत्या आदि अनेकों पाप, चाहे वे कामनावश ही किये गये हों, मनुष्यों के मौसल स्नान से नष्ट हो जाते हैं. और पूण्य दिनों में स्नान करने से उत्पन्न पूण्यका वर्णन वेदभी नहीं कर सकते हैं.

गंगा के किनारे दाह संस्कार की प्रथा लम्बे समय से चली आ रही है. जली हुई अस्थियों के विसर्जन से गंगा प्रदूषित नहीं होती है. लेकिन आज उस प्रथा को ही गंगा को दूषित करने का कारण माना जा रहा है. हिंदुत्व की बात करने वाले बड़े बड़े लोग आज इस मुद्दे पर मौन क्यों हैं, शायद इसलिए कि गंगा का संरक्षण को सभी सामूहिक कार्य मानते है और इसमें किसी का निजी फ़ायदा नहीं है?

निजी स्वार्थ के लिए माँ गंगा को आर्थिक फायदों के लिए उस पर अनगिनत अत्त्याचार किये जा रहे हैं.  गंगा के प्रदूषण के मुख्य कारण, जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण, गंगा नदी को जलमार्ग की तरह उपयोग में लाना, सीवेज को सीधे तौर में गंगा में डालना, कृषि के लिए अत्यधिक गंगा के जल का इस्तेमाल हैं, जिनकी तरफ अब तक की सरकारों ने कोई ध्यान नहीं दिया बल्कि इन्हें बढ़ावा दिया है. जबकि दूसरी तरफ सरकार यह दावा करते हुए आ रही है कि गंगा की सफाई करने से गंगा साफ़ और स्वच्छ रहेगी. जब गंगा को प्रदूषित करने वाले कारकों को इस तरह से बदावा दिया जा रहा है तो इस बात में क्या सत्यता है कि मात्र गंगा की सफाई से गंगा साफ़ हो जाएगी?

अतः मौजूदा सरकार से हमारा विनम्र निवेदन है कि गंगा को दूषित करने वाले वास्तविक कारणों जैसे  जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण, गंगा नदी को जलमार्ग की तरह उपयोग में लाना, सीवेज को सीधे तौर में गंगा में डालना आदि  को बंद करें अन्यथा गंगा की सफाई करना,  करोड़ों लोगों की आस्था के साथ मात्र एक खिलवाड़ होगा.


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