लेख


rudolph A furtado

गंगा नदी में खननकार्य (फोटो साभार: रुडोल्फ ए फुर्तादो)

 

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गंगा के किनारे खनन पर लगी रोक को हटा दी है. नदी में खनन कार्य भी आवश्यक होता है क्यूंकि नदी में गाद निरंतर बहकर आती रहती है.

 

अगर यह गाद निरंतर जमा होती है तो नदी में पानी का जलस्तर बढ़ जाता है जिससे की नदी का फैलाव बढ़ जाता है. अतः नदी में खननकार्य से नदी में अतिरिक्त गाद को हटा दिया जाता है, जिससे कि नदी का प्रवाह सरल हो जाता है.    

 

नदी के किनारों में खननकार्य की समीक्षा के लिए केंद्र सरकार नें चीतले समिति का गठन किया. चीतले कमिटी ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी (चीतले समिति की रिपोर्ट हम यहाँ देख सकते हैं) जिसमे बताया गया है कि गाद हटाने से नदी के बहाव में सुधर हो सकता है और इसलिए गाद हटाने के कार्य को न्याय संगत ठहराया जा सकता है. गाद हटाने का कार्य करते समय निम्न मूल सिद्धांतो का ध्यान होना चाहिए: 

 

  • नदी में गाद कम करने के लिए कृषि की बेहतर पद्दतियों वाटरशेड (जलग्रहण क्षेत्र प्रबंध) आवश्यक है.
  • कटाव, प्रवाह और गाद का जमाव नदी के प्रकिर्तिक कार्य हैं.
  • नदियों के प्रवाह में बिना किसी बाधा के बाढ़ के लिए पर्याप्त मैदान (पार्श्व संपर्क) प्रदान किया जाना चाहिए.
  • “गाद हटाने” की बजाय  “गाद के लिए रास्ता दें” की रणनीति अपनायी जानी चाहिए.  

 

अतः नदी के निरंतर बहाव के लिए खनन कार्य आवश्यक है. किन्तु चीतले समिति ने खननकार्य से होने वाले नुकसानों को नज़रंदाज़ किया है, जैसे कि

 

  • खनन से कछुओं और अन्य जीव जंतुओं की रिहायशी स्थान नष्ट हो जाते हैं और मछली के अंडे भी नष्ट हो जाते हैं, जिसका जिक्र रिपोर्ट में नहीं किया गया है. (जलीय जंतुओं के नुक्सान के सन्दर्भ में रिपोर्ट यह देख सकते हैं पेज 1 पॉइंट 1.2).
  • नदी के किनारों का कटान होने से नदी में महीन-कण अधिक मात्र में आते हैं और जलीय जीवों को नुक्सान होता है.
  • नदी के गहरे होने से सौर ऊर्जा द्वारा नदी के अधिक जल का उत्सर्जन नहीं होता है. परन्तु नदी में फैलाव की वजह गहराई कम हो जाती है जिससे कि सौर विकीरण द्वारा नदी के जल के कम होने का अधिक खतरा बना रहता है जिससे कि सतह और भूमि के अन्दर का जल सुख जाता है.
  • खनन के कारण, नदी द्वारा सिंचित मिट्टी की उपजाऊ क्षमता ख़तम हो जाती है. (अधिक जानकारी के लिए रिपोर्ट उपलब्ध है पेज 1, पैरा 4)

   

अतः खननकार्य को इस प्रकार से करना चाहिए कि नदी को नुक्सान नहीं हो और रेत-बालू-मिट्टी की लोगों की आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सके. खनन को निम्न प्रकार से किया जा सकता है:

 

  • नदी के एक क्षेत्र जैसे 5 किलोमीटर की दूरी में खनन किया जाए और दूसरे 10 किलोमीटर क्षेत्र को जीव जंतुओं के लिए छोड़ दिया जाय. 3 साल के बाद पूर्व में खनन किये गये क्षेत्र को जीव जंतुओं को छोड़ कर नए 5 किलोमीटर क्षेत्र में खनन किया जाय.
  • गंगा नदी में बहुत से ऐसे स्थान हैं जहाँ पर बड़े पुल और बड़े डैम का निर्माण हो रहा है वहां पर भी बहुताधिक मात्र में गाद जमाव का बड़ा कारण है. इन पुलों और डैम के निर्माणकार्य में ज्यादा गहराई का इस्तेमाल कर गाद जमाव की समस्या को कम किया जा सकता है. (तकनीकी प्रक्रियाओं को आप विस्तृत में यहाँ जान सकते हैं पेज 2, पॉइंट 1-15)

 

 अगर खनन को योजनाबद्ध तरीके से किया जाए तो राष्ट्रीय नदी गंगा को भी कोई नुक्सान नहीं होगा और मानवीय आवश्यकताएं भी पूरी की जा सकेंगी.


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