लेख


गंगा जीर्णोधार मंत्रालय के नए मंत्री श्री नितिन गडकरी

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने माँ गंगा के पुनरुद्धार के लिए गंगा जीर्णोधार मंत्रालय की जिम्मेदारी उनके कर्मठ सहियोगी नितिन गडकरी को सौंपी है. देश को आशा है कि श्री गडकरी उसी तत्परता से गंगा की सफाई करेंगे  जिस तत्परता से उन्होंने देश में सड़कों का जाल बिछाया है.

 

अब तक गंगा सफाई का पूरा फोकस सीवेज ट्रीटमेंट सयंत्रों पर रहा है. 1985 के गंगा एक्शन प्लान के बाद से केंद्र सरकार द्वारा नगरपालिकाओं को इन सयंत्रों को लगाने के लिए आर्थिक मदद दी गयी है. परन्तु नगर पालिकाओं की इन सयंत्रों को चलाने में रूचि नहीं होती है क्यूंकि उनके पास इन सयंत्रों को चलाने में खर्च करना उनके लिए कठिन होता है. इसलिए ये सयंत्र अक्सर बंद रहते हैं.

केंद्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि “ बिहार और उत्तरप्रदेश के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों को चलाने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है” (पेज 29, पॉइंट 5.1.2). वहीँ उत्तराखंड में स्वर्गाश्रम  सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्तिथि बहुत ख़राब है.( पेज 23, पॉइंट 3) और कानपुर का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद पड़ा हुआ है.( पेज 24, पॉइंट 2).

प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो, भारत सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार गंगा नदी वाले राज्यों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का अध्ययन किया गया जो कि निम्न तालिका में दर्शाया गया है:

 

 

उपरोक्त तालिका में हम देख सकते हैं कि गंगा प्रवाहित इन चार राज्यों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता की तुलना में उनका उपयोग बहुत कम है. राज्यों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की कुल  क्षमता 995.81MLD (Million Liters Per Day) है परन्तु कुल साफ़ किया गया पानी 542.47MLD है. अतः यह माना जा सकता है कि पानी की सफाई के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तो  लगाये गये हैं, पर वांछित परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं. यद्यपि इनकी क्षमता भी जरुरत से कम है लेकिन उन्हें चलाने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है.

सरकार को पूंजी सब्सीडी देने के स्थान पर ट्रीटेड पानी के खरीद का बाज़ार बनाना  चाहिए. ट्रीटमेंट प्लांट द्वारा साफ़ किया गया सीवेज सरकार द्वारा प्राइवेट प्लांट ऑपरेटरों से ख़रीदा जाए और उस जल को सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जाय. ऐसा करने से नगर पालिकाओं पर ट्रीटमेंट प्लांट चलाने का बोझ समाप्त हो जायेगा. केंद्र सरकार को भी पूँजी सहायता नही देनी होगी. ये प्लांट प्राइवेट पार्टियों द्वारा बैंक से ऋण लेकर लगाये जायेंगे. तब सिंचाई के लिए गंगा के जल को कम निकलना संभव होगा और गंगा जीवित रह सकेगी.

अतः गंगा पुनरुद्धार और संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी जी से आग्रह करते हैं कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों द्वारा साफ़ किये गए जल का उचित मूल्य दें ताकि गंगा साफ भी हो और इसमें पानी भी रहे.


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