लेख


बाह्य आक्रमण से जलविद्युत परियोजनाओं को खतरा (फोटो साभार: जीवन नेगी, विकिमीडिया)

 जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण से देश को अत्यधिक नुक्सान हैं.

 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र रावत जी नें अधिकारीयों और कर्मचारियों को हिमलय बचाओ अभियान की शपथ दिलाई.हम मुख्यमंत्री जी के इस अथक प्रयास का भरपूर स्वागत करते हैं.

किन्तु वहीँ दूसरी ओर सरकार निरंतर बाँध बनाकर देश की सुरक्षा को दावं पर लगा रही है. हाल ही में चीन ने डोकलाम विवाद में भारत को युद्ध के लिए ललकारा है. अगर चीन हमला करता है तो उसकी दृष्टि में जलविद्युत परियोजनाएं सर्वप्रथम होंगी. टिहरी बाँध चीन के अत्यधिक नज़दीक है और अगर वह इस पर हमला करता है तो इसका जल, पूरे उत्तर भारत में विनाश कर देगा.

अमेरिकी एयरफ़ोर्स हिस्टोरिकल एजेंसी की एक रिपोर्ट(पृष्ठ 44, पैरा 1) के अनुसार  वर्ष 1952 में, अमेरिका ने उत्तरी कोरिया पर हवाई हमला किया था जिसकी वजह से उत्तरी कोरिया का टक्सन बाँध पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और बहुत बड़ी संख्या में नुक्सान हुआ. बाँध टूटने की वजह से गगनचुम्बी इमारतें, बड़े पुल, सड़कें, मुख्य रेल मार्ग सभी बाड़ में बह गये थे. 

भारत के प्रख्यात भू-वैज्ञानिक प्रो. टी. शिवाजी राव की एक रिपोर्ट के अनुसार  -   “टिहरी बांध के टूटने पर प. बंगाल तक इसका व्यापक दुष्प्रभाव होगा. मेरठ, हापुड़, बुलन्दशहर में साढ़े आठ मीटर से लेकर 10 मीटर तक पानी ही पानी होगा.”

इन परियोजनाओं से उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन बढ़ रहा है. स्थानीय निवासियों की ज़मीन परियोजनाओं द्वारा लिए जाने के बाद वे पलायन को मजबूर हो जाते हैं. परियोजनाओं  के निर्माण से लोगों को स्थायी रोजगार नहीं मिल पता है और वे बेरोजगार होकर पलायन कर जाते हैं. परियोजनाओं से भू-स्खलन होता है जैसा कि विष्णुप्रयाग परियोजना के चाईन गाँव  में पावर हॉउस के नज़दीक हुआ है.इससे लोग पलायन करने को मज़बूर होते हैं .

पलायन के बाद वीरान पड़े गावं (फोटो साभार: रणजीत जाखी)

परियोजना बनने से एक बड़ा क्षेत्र जलमग्न हो जाता है. इसलिए पहले वहां के क्षेत्रीय निवासियों को विस्थापित किया जाता है जो कि एक और पलायन का बड़ा कारण है. पलायन के सम्बन्ध में आप विस्तृत जानकारी हमारी पिछली पोस्ट से ले सकते हैं.

सवाल यह है की एक तरफ सरकार हिमालय के संरक्षण की बात कर रही है जिसका की हम स्वागत करते हैं वहीँ दूसरी ओर जलविद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देकर देश की सुरक्षा को दावं पर लगा रही है. क्या सरकार की ऐसी विनाशकारी नीतियों को बढ़ावा देना लाभकारी है?


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