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टिहरी डैम के पीछे झील में गाद का भराव (फोटो साभार: विमल भाई)
टिहरी झील का गाद से भरने का औसत समय 130 से 171 वर्ष है, तो इस पयोजना से लम्बे समय का विकास कैसे संभव है?

 

टिहरी बांध के निर्माण का उद्देश्य बिजली उत्पादन और सर्दियों और गर्मियों के दौरान डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों को सिंचाई प्रदान करने का है. लेकिन समस्या गाद की है, जो दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है. हर साल झील में टिहरी बांध के पीछे गाद का जमाव हो  रहा है जिससे कि झील की पानी भंडारण की क्षमता कम हो रही है. शीघ्र ही यह बाँध उपयोगी नहीं रहेगा.

टिहरी परियोजना का उपयोगी जीवन स्तर तब  तक माना जा सकता है जब तक बांध में बरसात के पानी को संग्रह करने की क्षमता है.गाद के लगातार जमा होने से झील गाद से भर जाएगी एवं उसके पानी रखने की क्षमता ख़तम हो जाएगी.

टोजो विकास इंटरनेशनल लिमिटेड की  एक रिपोर्ट (पेज 16, पॉइंट 13) के अनुसार टिहरी झील 130 वर्षों में गाद से भर जाएगी एवं इसके बाद यह जाड़े एवं गर्मी में पानी उपलब्ध नहीं करा सकेगी. इसी तरह, ए.सी. पांडे द्वारा एक रिपोर्ट (पृष्ठ 24, प्रकरण 2) में किये गये एक अध्ययन के अनुसार जलाशय की उपयोगी क्षमता 171 साल की है. 

नीचे 2007 में चिनियालिसौर के पास से ली गई टिहरी झील के उपरी छोर की तस्वीर दे रहे हैं. दाहिने हाथ की तरफ गाद जमा है. वर्तमान में स्थिति और भी खराब होगी.

टिहरी झील के बाएँ तरफ गाद का जमाव साफ देखा जा सकता है (फोटो साभार: विमल भाई)

उपरोक्त दोनों अध्ययनों को टीएचडीसीएल द्वारा कराया गया था जो कि टिहरी परियोजना को चलाता है. स्पष्ट है कि टिहरी बाँध का जीवन 130 से 171 वर्ष मात्र है. 130-170 वर्षों के बाद टिहरी परियोजना एक सफेद हाथी बन जाएगा. इसके बाद यह केवल पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा.

सत्ता में आने के बाद, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि "अब हमें गंगा से कुछ नहीं लेना है, केवल देना है." इसलिए हम उनसे अनुरोध करते हैं कि टिहरी बांध को जितनी जल्दी हो सके 
हटाया जाय क्यूंकि भविष्य में टिहरी बाँध की गाद से पूरी तरह भर जाने के बाद इसे हटाना मुश्किल होगा.

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