लेख


कुछ फसलों की पैदावार के लिए अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है (फोटो साभार: वेमेंकोव, विकिमीडिया)
जिन फसलों को अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है और उनमे सिंचाई के लिए गंगा के जल से पूर्ति की जाती है तो उन फसलों को तुरंत प्रतिबंधित कर देना चाइये.

 

हाल ही में, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि गंगा की सफाई के लिए केवल समितियां बनाई जा रही हैं और कोई वास्तविक काम नहीं हो रहा है। हम मुलायम सिंह यादव के इस बयान का स्वागत करते हैं। लेकिन यह भी सच है कि यूपी द्वारा सिंचाई के लिए गंगा नदी का अधिकांश पानी निकाला जाता रहा है, जिस पर पिछले पांच वर्षों से उनके बेटे द्वारा शाशन किया गया था।

कुछ फसलों को जल की ज्यादा मात्र में आवश्यकता होती है जैसे कि गन्ने, मेथा आदि आईआईटी की रिपोर्ट(पेज7, पैरा1) में इसका उल्लेख किया गया है:

“High population growth, rising per capita income and increase in standard of living of people, have encouraged the farmers to diversify agriculture towards high water intensive crops such as sugarcane, paddy and wheat which put more stress on the water resources.”

गंगा नदी बेसिन पर खेती और सिंचाई के लिए भारतीय IIT दारा तैयार किये गए आंकड़े

 

ऊपर दी गई तस्वीर में, हम देख सकते हैं कि उत्तर प्रदेश का क्षेत्र सर्वाधिक गंगा द्वारा सिंचित है। हम नीचे बार ग्राफ में देख सकते हैं कि 1962 से 2006 तक गंगा नदी के बेसिन में सबसे ज्यादा सिंचाई उत्तर प्रदेश में ही हुई है।

गंगा नदी बेसिन पर खेती और सिंचाई के लिए भारतीय IIT दारा तैयार किये गए आंकड़े

 

नीचे दिए गए चित्र में हम देख सकते हैं कि 1950 से 2008 तक गन्ना (उच्च पानी की खपत वाली फसल) का उत्पादन अन्य फसलों की तुलना में काफी अधिक है, जिसके लिए सबसे ज्यादा पानी गंगा नदी से लिया जाता है।

 

गंगा नदी बेसिन पर खेती और सिंचाई के लिए भारतीय IIT दारा तैयार किये गए आंकड़े

 

गंगा जल से बड़ी मात्रा में पानी निकालने का मुख्य कारण इस प्रकार की फसलों की ज्यादा पैदावार है। फिर गंगा नदी को कैसे बचाया जा सकता है? गंगा को तभी बचाया जा सकता है, जब गन्ने और मेन्था जैसी फसलों की खेती पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। तभी गंगा से हमारे द्वारा कम पानी लिया जाएगा और गंगा नदी जीवित होगी

 

सत्ता में आने के बाद, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि "अब हमें गंगा से कुछ नहीं लेना है, हमें केवल गंगा को देना है. इस अमूल्य वक्तव्य को ध्यान में रखते हुए, हम प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से आग्रह करते हैं कि वे फसलें, जिनकी पैदावार के लिए अत्यधिक गंगाजल का प्रयोग हो रहा है , उनकी खेती पूर्ण रूप से बंद कर दी जानी चाहिए ताकि गंगा जल का दोहन कम हो जाए और गंगा नदी का अस्तित्व बच सके. हम मुलायम सिंह जी से भी अनुरोध करते हैं कि वे उत्तरप्रदेश में गंगा के पानी के अतिदोहन के विरुद्ध आवाज़ उठायें.


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