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 भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में उत्तरकाशी में विनाशकारी भूस्खलन (फोटो साभार: सुमित राणा)

निरंतर बांधों के निर्माण के चलते सरकार ने भागीरथी नदी क्षेत्र को इको-सेंसिटिव क्षेत्र घोषित किया है. परियोजनाओं के निर्माण से बेरोजगारी की समस्या बढ़ने लगी है.

 

गंगा नदी क्षेत्र में परियोजनाओं के निर्माण के विरोध के लिए IIT कानपूर के फॉर्मर प्रोफेसर एवं डीन डॉ. जी.डी. अग्रवाल ने आमरण अनशन किया था. जिसे देखते हुए भारत के पूर्व वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी एवं अन्य दो केंद्रीय मंत्री श्री जय राम रमेश और श्री शुशील कुमार शिंदे ने वर्ष 2010 में तीन जलविद्युत परियोजनाओं (लोहारीनाग पाला, मनेरी और बैरों घाटी) को बंद करने का फैसला लिया था. भारत सरकार ने कहा था:

“Declare the approximately 135 km stretch from Gaumukh to Uttarkashi as an eco-sensitive zone under the environmental protection act 1986. "(इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध है पेज 3 पैरा 1)"

भागीरथी क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने का अर्थ है कि इस क्षेत्र में बिना प्रकिर्तिक नुक्सान पहुंचाए इस क्षेत्र का विकास करना. इस क्षेत्र में बिजली उत्पादन और रोजगार की दृष्टि कई जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण हुआ है जिनके नुकसानों का वर्णन नीचे किया गया है:-

  • आर्थिक दृष्टि से इन परियोजनाओं द्वारा उतपादित बिजली का कोई भी फ़ायदा इको-सेंसिटिव जोन में रह रहे क्षेत्रीय लोगों को नहीं मिल पाता है.
  • इन परियोजनाओं के निर्माण से स्थानीय लोगों को रोजगार ज्यादा समय तक नही

मिलता है. तीन-चार साल में परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा हो जाता है जिसके बाद स्थानीय लोग बेरोजगार हो जाते हैं. जलविद्युत परियोजनाओं से प्रकीर्ति को नुक्सान होता है जिससे दीर्धकाल में पर्यटन में गिरावट आती है और रोज़गार कम होते हैं.

इको-सेंसिटिव क्षेत्र में जलविद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के बजाय इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा दे सकते हैं.

  • पर्यटन को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय लोगों के लिए रोजगार के विकल्प बढ़ेंगे जो कि क्षणिक रोजगार नहीं बल्कि लम्बे समय के लिए आय का श्रोत बनेंगे.
  • पर्यटन को बढ़ावा देने से प्रकिर्तिक नुक्सान नहीं होगा और पर्यटन बढेगा.

सत्ता में आने के बाद, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि "अब हमें गंगा से कुछ भी नहीं लेना है, केवल हमें गंगा को देना है।" इसलिए हम प्रधान मंत्री जी से अनुरोध करते हैं कि भागीरथी इको सेंसिटिव जोन को सुरिक्षित रखा जाये ताकि लोगों को दीर्घकालीन रोज़गार मिल सके.


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