लेख


सिंचाई के लिए पानी का अत्यधिक उपयोग पानी का नुक्सान है (फोटो साभार: जेफ़ वानुगा, विकिमीडिया)
सिंचाई के लिए गंगाजल का अत्यधिक इस्तेमाल हो रहा है जिसकी वजह से गंगा नदी अपना अस्तित्व खो रही है. अगर हम गंगा से सिंचाई के लिए पानी निकालना कम कर दें तो ही गंगा जीवित रह सकती है. यदि हम बारिश के पानी का भूजल संरक्षण करें तो हम गंगा के पानी को निकलना कम करके बचा सकते हैं.
भूजल के पुनर्भरण के लिए बोर-वेल से पानी को जमीन में डाला जाता है. इस तरह जल को एक बड़े भूभाग पर फैलाया जा सकता है ताकि वह जल भूमि द्वारा सोखा जा सके और भविष्य में सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो सके.
जल को इस तरह फ़ैलाने से भूमिगत जल का पुनर्भरण होता है (फोटो साभार: जेफ़ वानुगा, विकिमीडिया)
वर्षा जल से भूजल पुनर्भरण करने से निम्न लाभ हैं:-
  • भूजल से वितरण आसानी से हो सकता है. जहां आवश्यक हो वहां ट्यूब, कुओं द्वारा जमीन से पानी निकाला जा सकता है. नहर बनाना आवश्यक नहीं है.
  • भूमि के अन्दर पानी का वाष्पीकरण नहीं होता है.
  • वर्षा का जल जमीन द्वारा सोख लिया जाता है जिससे कि बाढ़ का खतरा कम हो जाता है.
  • वर्षा जल संचयन के कारण मिट्टी का क्षरण कम हो जाएगा.
  सत्ता में आने के बाद, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि "अब हमें गंगा से कुछ भी नहीं लेना है, केवल हमें गंगा को देना है." इसलिए हम प्रधान मंत्री जी से अनुरोध करते हैं कि वर्षा जल संचयन के लिए उचित उपाय करें ताकि गंगा में पानी की उपलब्धता बनी रहे. 
आपसे निवेदन है कि पोस्ट पढ़कर नीचे अपना कमेंट/सुझाव आवश्य दें.

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