लेख


कृत्रिम भूजल रिचार्ज सिस्टम उत्तर-पश्चिम सैन फर्नांडो घाटी(फोटो साभार: L.A.Aqueduct Centennial)

हाल ही में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस्राइल का दौरा किया. इस्राइल में पहले, पानी की भारी कमी थी लेकिन अब वे कृत्रिम भूमि जल रिचार्ज की प्रक्रिया का उपयोग कर रहे हैं, जिसके द्वारा उन्होंने मनुष्य उपयोगों के लिए पानी की उपलब्धता में वृद्धि की है।

 

कृत्रिम भूजल रिचार्ज सिस्टम का मतलब है कि दूषित जल को आंशिक रूप से जमीन में फैला दिया जाता है. यह फैलाया हुआ जल, भूमि द्वारा सोख लिया जाता है जिससे भूमि के अन्दर जल स्तर को बढ़ जाता है फिर इसे उपयोग में लाया जाता है. यह प्रक्रिया निम्न लाभ प्रदान करती है:

  • भूमि के अन्दर जल भंडार का वाष्पीकरण नहीं होता है जिससे की कुल जल की उपलब्धता में वृद्धि होती है.
  • इस पद्धति द्वारा पानी की सफाई का खर्च भी कम होता है क्यूंकि पानी को सयंत्र द्वारा एक ही बार साफ़ किया जाता है बाकी पानी की सफाई भूमि के अन्दर ही हो जाती है.

कृत्रिम भूजल रिचार्ज सिस्टम द्वारा उन स्थानों पर शुद्ध पानी, भूमि से निकाला जाता है जहां पानी की आवश्यकता होती है. इससे पहले, इस्राइल प्रदूषित पानी सीधे जमीन में डाल रहा था, जिसकी वजह से एक्वीफायर में प्रदुषण बढ़ रहा था इसलिए इसे बंद कर दिया गया है. एक तालिका में नीचे दिखाया गया है कि जमीन में पानी के प्रसार में वृद्धि हुई है. यहाँ हम देख सकते हैं की 1961-1970 के दशक के बाद कुओं से भूजल से रिचार्ज की प्रक्रिया घटी है , जबकि जल को भूमि पर फैलाकर रिचार्ज करने की प्रक्रिया निरंतर बढ़ी है.

(तालिका Schwarz और J. Bear की रिपोर्ट से ली गयी है – आप रिपोर्ट यहाँ देख सकते हैं )

 

हाल ही में भारत में, बेंगलुरू ने इसी प्रक्रिया को शुरू किया है. बेंगलुरु जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड के अनुसार:

  “We have proposed a project of artificial wet land, an Israeli technology, to Karnataka State Pollution Control Board. The project will cost `10 crore. It will involve setting up a Sewage Treatment Plant (STP) and using vegetation to recharge ground water. We will be using this method.”

टिहरी बांध के मुख्य उद्देश्यों में से एक दिल्ली को पीने के पानी की आपूर्ति करना है। अगर दिल्ली इस इस्राइली तकनीक को अपनाता है तो आवश्य ही दिल्ली में शुद्ध पानी की उपलब्धता बढ़ जाएगी और टिहरी बाँध को हटाया जा सकेगा.

हम प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह करते हैं कि सभी भारतीय शहरों के लिए यह तकनीक अपनाने के लिए अनिवार्य प्रयास करे ताकि हमारी नदियों से ताजा पानी निकालने की मांग कम हो और टिहरी जैसी परियोजनाओं को हटाया जा सके.


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