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 गंगा नदी के पवित्र जल में स्वयं को शुद्ध रखने की विलक्षण शक्ति होती होती है जिसे बाँध प्रभावित कर रहें है जिस कारण करोडो हिन्दुओ की आष्था को नुकसान हो रहा है .

 

आज भी लाखों हिन्दू कांवड़ यात्रा के बाद ताम्बा/पीतल के बर्तन में गंगा नदी के पवित्र जल को अपने अपने घर ले जाते हैं और पूजा पाठ में इसका उपयोग करते हैं. करोड़ो हिन्दू इस बात को मानते हैं की गंगाजल में कीटाणु नहीं पनपते और  वह सालों तक खराब नहीं होता.

नागपुर स्थित नेशनल एन्वायरनमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्युट ने पाया है की गंगा की बालू में तांबा, क्रोमियम तथा सूक्ष्म मात्रा में रेडियोधर्मी थोरियम अन्य नदियों की तुलना में कई गुना अधिक है. इन तत्वों में कीटाणुओं को मारने की क्षमता होती है. ये तत्व गंगा नदी में पानी द्वारा पत्थरों की रगड़ से उत्पन्न होते हैं. गंगा जल के शुद्ध रहने का एक और कारण बताया गया है की गंगा के पानी में कालिफाज नामक लाभप्रद कीटाणु पाया जाता है. इसी प्रकार गंगा में कालीफार्म नामक हानिकारक कीटाणु भी पाया जाता है जो मनुष्यों के मल से पानी में प्रवेश करते हैं. साधारणतः एक प्रकार के कालिफाज एक विशेष प्रकार के कालीफार्म को खा लेता है और नदी को साफ़ कर देता है लेकिन गंगा का कालिफाज कई प्रकार के कालीफार्म को खा जाता है. गंगा की अपने को स्वयं शुद्ध करने की क्षमता का रहस्य इन्ही कालिफाज में है. ये कालिफाज बालू में रहते है जो पत्थरों की रगड़ से पैदा होते हैं. अतः अगर बालू नीचे नहीं पहुंचेगी तो ये कालिफाज भी नीचे नहीं पहुंचेंगे. बांधों के कारण   पानी की रगड़  कम हो जाती है जिसके कारण तांबा, क्रोमियम तथा सूक्ष्म मात्रा में रेडियोधर्मी थोरियम उत्पन्न नहीं होता और इस वजह से कालिफाज भी प्रभावित हो रहे हैं. नीरी की रिपोर्ट यहाँ है आप देख सकते हैं.

गंगा नदी में मौजूद कालीफार्म फोटो साभार विकीकोमन

हालांकि नीरी ने अपनी रिपोर्ट में माना है की कालिफाज टिहरी बाँध के ऊपर भी मौजूद है और कुछ मात्रा में बाँध के नीचे भी मौजूद है.  नीरी की इस बात से हम सहमत नहीं है की बांधों की वजह से कालिफाज प्रभावित नहीं हो रहे हैं. क्योंकी  अभी कालिफाज टिहरी बाँध के नीचे भी मौजूद है जो पहले से बालू के साथ बाँध के नीचे पहुँच गए थे . लेकिन बांधों की श्रृंखला बनाने से इन कालिफाज का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा क्योंकि बांधो के कारण बालू आगे नहीं जा पाती और ये कालिफाज भी बांधो के जलाशयों में फंस जाते है. निरंतर बन रहे बांधों के कारण ये कालिफाज प्रभावित होते हैं और गंगा के स्वयं को शुद्ध रखने की क्षमता को नुक्सान होता है . लाखों श्रद्धालु जो गंगा जल को आस्था के साथ बर्तन में भरकर घर ले जाते हैं उनकी आस्था को भी नुक्सान होता है.

हम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह करते हैं की करोड़ो लोगों की आस्था को देखते हुए गंगा की इस विलक्षण क्षमता का सरंक्षण करें . आज भागीरथी पर टिहरी बाँध, अलकनंदा पर विष्णुप्रयाग और श्रीनगर बाँध के कारण के कारण गंगा की इस विलक्षण शक्ति का नाश हो रहा है. गंगा की इस शक्ति का सरंक्षण करने के लिए इन सभी बांधो को हटाया जाय जिससे गंगा के पानी की पत्थरों पर रगड़ बनी रही.

 

 


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