लेख


गंगा में स्नान करते श्रद्धालु (फोटो साभार: विकिमीडिया)

राम नवमी के अवसर पर भक्तों ने गंगा नदी में पवित्र डुबकी लगाई लेकिन गंगा में डुबकी लगाने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है.

सरकार स्वीकार करती है कि नदी में कुछ न्यूनतम पानी जारी किया जाना चाहिए हालांकियह राशि मुख्य रूप से मछली की आवश्यकताओं पर निर्धारित होती है. जल संसाधन मंत्रालय (भारत सरकार) ने रिपोर्ट(ई-फ्लोव्स रिपोर्ट) तैयार की जिसके अनुसार :

 “E-flows refer to the quality, quantity and timing of the water flows required to maintain the components, functions, processes and reliance of the aquatic ecosystems that provide goods and services to people.” (page No. 3, Para. 3, Point 2.)

यह रिपोर्ट कहती है कि गंगा में मछलियों के लिए आवश्यक पानी 0.5 से 0.8 मीटर या 1.4 से 2.6 फीट है. दिये गए टेबल मेंऋषिकेश में पशुलोक बांध पर स्वर्ण महासीर मछली के लिए आवश्यक पानी की गहराई दिखाई गई है.

 

रिपोर्ट कहती है कि:

To determine these requirements, the keystone species in the given river stretches are identified and required depths D1 and D2 are determined for these species”. रिपोर्ट यहां संलग्न है. {पेज l1}

स्पष्ट है कि जल संसाधन मंत्रालय ने मछलियों को देखा है लेकिननहाने के लिए आवश्यक पानी पर ध्यान नहीं दिया. गंगा का नहात्व उसके भावनात्मक प्रभाव के कारण है जिसमें स्नान जैसे अनुष्ठान भी शामिल होता हैं. इसलिए, गंगा का कायाकल्प मुख्य रूप से स्नान के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.आईआईटी रुड़की के प्रबंधन विभाग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि स्नान के लिए 3-4 फुट पानी की आवश्यकता होती है. नीचे दिया गया ग्राफ़ दिखाता है कि 72 लोगों में से 52 का सुझाव है कि गंगा में स्नान के लिए आवश्यक पानी 3-4 फुट होना चाहिए. विस्तृत रिपोर्ट यहां संलग्न है.

  

हम श्री नरेन्द्र मोदी से अनुरोध करते हैं की जल संसाधन मंत्रालय से गंगा नदी में स्नान करने के लिए पर्याप्त पानी को छोड़ने के लिए निर्देश दें. मछली के आधार पर गंगा में स्नान के लिए पानी छोड़ना उचित नहीं है.


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