लेख


 

देश में प्रदूषण पर लगातार होती राजनीति

दिल्ली में प्रदूषण| ममता बनर्जी| नरेंद्र मोदी| राहुल गाँधी

विश्व के मेट्रो शहरों में से दिल्ली को सबसे प्रदूषित स्थान दिया गया है. दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 14 शहर भारत में हैं. हाल में भारत और श्रीलंका के बीच क्रिकेट मैच के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह श्रीलंकाई क्रिकेटरों को प्रदूषण मास्क में देखकर शर्मिंदा थीं. इसी चिंता को व्यक्त करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि हमें दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के कदम उठाने की जरूरत है.

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी चिंतित हैं. हालांकि, इसके लिए उन्होंने जनता को दोषी ठहराया है. राज्य पर्यावरण मंत्रियों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदूषण का कारण जनता की बदलती हुई जीवन शैली है. लेकिन इस पोस्ट में हम बतायेंगे कि कैसे यह बढ़ता प्रदूषण सरकार की विफलता के कारण है.

लाभ-लागत | वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है. अतः वायु प्रदूषण कम होने से जनता के स्वाथ्य में सुधार होता है. स्वस्थ्य में सुधार से लोगों की आयु बढ़ती है. अतः इस समस्या का हल पाने के लिए जनता कुछ रकम अदा करने के लिए तैयार रहती है. इस रकम को Value of Statistical Life या VSL कहा जाता है. VSL के आधार पर अर्थशास्त्री वायु प्रदूषण के लाभ की गणना करते हैं.

वायु प्रदूषण के नियंत्रण की लागत वह होती है जो कि प्रदूषण फ़ैलाने वालों  को वहन करनी पड़ती है. जैसे थर्मल पवार प्लांट में धूएँ को साफ़ करने का खर्च वायु प्रदूषण के नियंत्रण का खर्च होता है.

अर्थशास्त्री किसी परियोजना के लाभ और लगत की अलग अलग उपरोक्तानुसार गणना करते हैं. फिर लागत से लाभ को विभाजित कर "लाभ-लागत अनुपात" बनाया जाता है. यदि लाभ-लागत अनुपात 1 से अधिक है, तो इसका मतलब है कि लाभ अधिक है और परियोजना को स्वीकृत किया जाता है.इसके विपरीत, यदि लाभ-लागत अनुपात 1 से कम है, तो इसका मतलब है कि लाभ लागत से कम है और परियोजना को अस्वीकृत कर दिया जाता है.

बिल एवं मेलिंडा गेट्स| फ्लू गैस डीसफ्युराईज़ेशन| पावरप्लांट

बिल एवं मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के एक अध्ययन (यहां रिपोर्ट देखें) ने भारत में आठ बिजली संयंत्रों में फ्लू गैस डीसफ्युराईज़ेशन(FGD) तकनीक शुरू करने के लाभ और लागत का अध्ययन किया. नीचे तालिका में 8 बिजली संयंत्रों में एफजीडी को फिट करने के लाभ-लागत अनुपात को देख सकते हैं:

Table 1: Benifit/Cost Ratos for FGD Retrofits

Plant Name VSL=$84,036,r=3% VSL=$160,000,r=3% VSL=$256,000,r=3% VSL=$256,000,r=8%
Dadri 6.0 11 18 14
Unchahar 4.0 7.5 12 9.5
Bakreswar 1.8 3.4 5.5 4.3
Dahanu 1.3 2.4 3.8 3.0
Talcher 0.77 1.5 2.4 1.9
Koradi 0.53 1.0 1.6 1.3
Rayalaseema 0.29 0.56 0.89 0.70
Tuticorin 0.27 0.51 0.82 0.65

बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने पाया कि 8 में से 6 थर्मल संयंत्रों में,एफजीडी उपकरण को फिट करने की लागत कम और लाभ ज़्यादा था. दादरी में लाभ 6 से 18 गुना था.अर्थ यह हुआ कि अगर सरकार दादरी बिजली संयंत्र में एफजीडी फिट करती है, तो लोगों को 6 से 18 गुना लाभ होगा.

दादरी सयंत्र में अगर FGD तकनीक का प्रयोग कर उत्पादन किया जाता है तो यह प्रदूषण नहीं होगा

OECD| शंघाई – चीन| कोयला कारखाने| प्रदूषण नियंत्रण

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) द्वारा एक अध्ययन (यहां रिपोर्ट देखें) में वायु प्रदूषण के नियन्त्रण के लाभ और लगत को मापा गया. OECD द्वारा दिया गया ग्राफ हम नीचे देख सकते हैं:

ग्राफ में हरे कालम लाभ और लाल कालम लागत को दिखाते हैं. इस चार्ट में प्रदूषण नियंत्रण के चार स्तरों पर लाभ और लागत का आंकलन किया गया है. यह ग्राफ दर्शाता है कि हर स्तर के नियंत्रण पर अगर सरकार 1 रूपया खर्च करे तो उनसे होने वाले फायदे 5-20 गुना अधिक होंगे.

 

चीन में कोयले सयंत्रों द्वारा बगैर प्रदूषण की चिंता किये हुए उत्पादन किया जाता है

बांग्लादेश| कोपनहेगन कन्सेंसस सेंटर| ईंट भट्टे| लाभ एवं लागत

प्रश्न यह है कि जब वायु प्रदूषण के लाभ, लागत से अधिक हैं, तो सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों को लागू क्यों नहीं करती है? इस समस्या का समाधान कोपेनहेगन सेन्सस केंद्र द्वारा किए गए बांग्लादेश के अध्ययन में दिया गया है. इस अध्ययन में ढाका के पास ईंट भट्टों में बेहतर प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित करने के लिए समाज और ईंट भट्टा मालिकों को होने वाले लाभ और खर्च की अलग-अलग गणना की है.

पाया गया कि वायु प्रदूषण के नियंत्रण का लाभ आम आबादी को होता है जबकि प्रदूषण नियंत्रण की लागत उद्योग मालिकों को वहन करनी होती है. अतः प्रदूषण को नियंत्रित करना उद्योगों को फायदेमंद नहीं होता है.समाज के लिए लाभ बहुत अधिक हैं परन्तु इससे उद्योगों को सरोकार नहीं होता है.अध्ययन में पाया गया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण की नयी (IZK) तकनीक को अपनाने में, लोगों का लाभ 4857 बीडीटी मिलियन होगा जबकि लोगों की लागत 408 बीडीटी मिलियन आएगी जैसा नीचे तालिका में दिखाया गया है. आम आबादी को शुद्ध 4449 बीडीटी मिलियन का लाभ होगा.

Table 2: Annualized social beifits and costs of full conversation to cleaner brick kilns in Greater Dhaka, 2014 (BDT million)

        Benifits Cost
  Vsl DALY  
From CSK to IZK 4,857 3,184 408
New IZK 4,857 3,184 815
New VSBK 8,606 6,097 1,605
New HHK 13,766 11,257 3,261

 Note: Annualized benifits and costs are 5% discount rate. VSL= valuation of avoided deaths using VSL. DALY= valuation of a DALY at GDP per capita.

ईंट भट्टा मालिकों के लिए लाभ और लागत अलग है. नीचे दी गई तालिका में (तालिका 9.1) हम देख सकते हैं कि ईंट भट्टा मालिकों की लागत 5333 रुबीडीटी मिलियन है जबकि उनके लिए लाभ केवल 1440 बीडीटी मिलियन है.इन्हें 3893 बीडीटी मिलियन का शुद्ध नुक्सान होगा. इसलिए वे नयी (IZK) तकनीक को लागू करने में रुचि नहीं रखते हैं.

  From  FCK to IZK New  IZK New VSBK New HHK
Costs:        
Investment Cost 5,333 10,667 21,000 42,667
Benifits: - - - -
Increased Production Value Per  Year 0 0 0 3,000
Cost Savings Per Year 1,440 1,440 3,440 5,600
Private benifits Per Year 1,440 1,440 3,440 8,600

 अगर हम निजी और सामाजिक लाभ एवं लागत को जोड़ते हैं, तो हम देख सकते हैं कि आम आदमी को 4449 बीडीटी मिलियन का लाभ होगा ईंट भट्टी मालिकों को 3893 बीडीटी मिलियन का नुकसान होगा. यह बताता है कि यद्यपि नयी (IZK) तकनीक समाज के लिए फायदेमंद है लेकिन यह ईंट भट्टी मालिकों के लिए लाभदायक नहीं है इसलिए ईंट भट्टी मालिक वायु प्रदूषण नियंत्रण नहीं करना चाहते हैं और लोग वायु प्रदूषण से पीड़ित हैं.

बांग्लादेश में ईंट भट्टे के मालिकों द्वारा बगैर प्रदूषण की चिंता किये हुए उत्पादन किया जाता है

सारांश| प्रदूषण फेक्टरियाँ| वायु प्रदूषण यंत्र| प्रदूषण की समस्या

समस्या का समाधान सरकार द्वारा ईंट भट्टों को वायु प्रदूषण उपकरण स्थापित करना अनिवार्य बनाना होगा.

वायु प्रदूषण की समस्या वास्तव में सरकार द्वारा निष्क्रियता की समस्या है. प्रदूषण का नियंत्रण समाज के लिए फायदेमंद है. लेकिन क्योंकि निजी उत्पादकों के लिए नुकसानदेह है इसलिए वे वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित करने में अनिच्छुक हैं.इस विषय पर सरकार को नियम बनाने और उन्हें कार्यान्वित करने की जरुरत है.इस प्रकार के नियमों के बनने और उनके पालन होने से वायु प्रदूषण को साफ किया जा सकता है और लोगों का स्वास्थ्य बचाया जा सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत में वायु प्रदूषण की समस्या जीवनशैली में बदलाव के कारण है. यह मान्य नहीं है क्योंकि दुनिया के स्वच्छ महानगरों में हम स्वीडन में ब्रेडकलैन, फिनलैंड में मुओनो, स्पेन में एल पुएयो, फ्रांस में ला प्लेन, पुर्तगाल में गुइमारायस आदि को पाते हैं.समस्या अगर जीवनशैली की होती, तो इन शहरों को दिल्ली से अधिक प्रदूषित होना चाहिए था. समस्या जीवनशैली नहीं है बल्कि समस्या प्रदूषकों पर उचित नियम लगाकर प्रदूषण को रोकने की है.

समस्या यह है कि सरकार प्रदूषकों के खिलाफ कदम उठाने को तैयार नहीं है.सरकार की इस निष्क्रियता का नतीजा यह है कि देश के लोग प्रदूषण से पीड़ित हैं. अगर सरकार ने प्रदूषकों को वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित करने के लिए मजबूर किया तो समाज को बड़े पैमाने पर लाभ होगा और वायु प्रदूषण से मुक्ति मिल जायेगी.

 


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