लेख


इलाहाबाद नाम इस्लामिक शब्द "अल्लाह" से लिया गया है जिसका अर्थ अल्लाह का निवास स्थान है. यह नाम लोगों का ध्यान अल्लाह की तरफ आकर्षित करता है. इस्लाम में अल्लाह का कोई रूप और आकार नहीं है और यह सबसे शक्तिशाली और सर्वज्ञानी है. ईसाई धर्म में भी केवल एक ही गॉड है जिसका कोई रूप और आकार नहीं है और वह भी सबसे शक्तिशाली है. हिंदू धर्म में भी परमात्मा का भी कोई रूप नहीं है और यह सबसे शक्तिशाली है अतः इलाहाबाद नाम लोगों का ध्यान अल्लाह या गॉड या परमात्मा की शक्ति की तरफ आकर्षित करता है.

“प्रयागराज” नाम गंगा और यमुना के संगम या "प्रयाग" को दर्शाता है. यह नाम लोगों का ध्यान गंगा की आध्यात्मिक शक्तियों की ओर खींचता है. अब प्रश्न यह है कि ये शक्तियां क्या हैं? हिंदू मनोविज्ञान का मानना ​​है कि रीढ़ की हड्डी में सात चक्र या मानसिक केंद्र होते हैं. प्रत्येक चक्र मानव शरीर के कुछ हिस्सों को नियंत्रित करता है और इनके मानसिक पहलू भी होते हैं. इनमे विशेष देवताओं का वास भी होता है.

मेरु दंड में सात मनोवैज्ञानिक चक्र होते हैं

हमारी समझ के अनुसार इन सात चक्रों की परिस्थिति निम्न प्रकार से है:

Serial No. Chakra Colour Phychic Power Deity
1. Root (Base of spine) Deep Red Security Devi
2. Sacral (Below Navel) Orange Sex, Energy Ganesha
3. Navel (Navel) Yellow Activity Vishnu
4. Heart (Heart) Blue Emotions Shiva
5. Throat (Throat) Violet Communication Brahma
6. 3rd Eye (Behind Eyes) White Thinking Indra
7. Crown (Skull) Transparent Universal Energy Allah, Parmatma

ऊपर दिए गए प्रत्येक चक्र का सम्बन्ध एक रंग से होता है जिसे ऊपर तालिका में दिखाया गया है. आप देखेंगे कि इंद्रधनुष के सात रंगों के क्रम में रंगों का संबंध विशेष देवताओं से दिखता है. जैसे देवी का रंग लाल (रक्त), गणेश का नारंगी रंग, विष्णु का पीला रंग (पीताम्बरी), शिव का नीला रंग (नीलकंठ) सा दिखता है. गंगा को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. विष्णु का स्थान पीले रंग के अनुसार नाभि में होता है. यह चक्र गतिविधि और दृढ़ संकल्प को नियंत्रित करता है.

गंगा शब्द में व्यंजन "ग" का दो बार उपयोग होता है. व्यंजन "ग" भी गतिविधि और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है. इसी व्यंजन "ग" से अंग्रेजी का शब्द "Go" बना है जो की गतिविधि को दर्शाता है. इसलिए गंगा नाम भी गतिविधि और दृढ़ संकल्प को बढाता है. अतः शब्द गंगा नाभि चक्र को सक्रिय करता है और व्यक्ति को गतिविधि और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देता है.

अब हम इलाहाबाद और प्रयागराज नामों का मानसिक प्रभाव देख सकते हैं. इलाहाबाद नाम क्राउन चक्र से जुड़ा हुआ है और व्यक्ति को अल्लाह या परमात्मा से जुड़ने में मदद करता है. प्रयागराज नाम नाभि चक्र से जुड़ा है और व्यक्ति को अधिक सक्रिय और दृढ़ बनाने में मदद करता है. अतः गंगा या प्रयागराज नाम हमारी उर्जा को नाभि चक्र पर केंद्रित करता है. दूसरी तरफ, इलाहबाद अथवा पर्मत्माबाद नाम क्राउन चक्र पर केंद्रित है और सार्वभौमिक ऊर्जा से जुड़ता है. अगर कोई व्यक्ति गंगा नाम का जप करता है तो उसका नाभि चक्र सक्रिय होगा और उसकी गतिविधि में वृद्धि होगी. अगर वही व्यक्ति बार-बार “अल्लाह” या “परमात्मा” का जप करता है तो वह सार्वभौमिक ऊर्जा से जुड़ जाएगा और उसके सभी चक्र सक्रिय हो जाएंगे. हमारी समझ से नाभि चक्र का सक्रीय होना लाभप्रद होता है परंतु सभी चक्रों का सक्रीय होना ज्यादा लाभप्रद होता है. 

इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज रखने में हम अपना ध्यान परमात्मा के स्थान पर विष्णु पर केंद्रित करते हैं. एक तरह से हम उच्च स्तर से निम्न स्तर पर आ रहे हैं. अगर हम इलाहाबाद का नाम परमात्माबाद रखे तो हम भगवान की उच्च आध्यात्मिक शक्तियों पर अपना ध्यान बनाए रखेंगे.


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