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सरकार नें इलाहबाद का नाम प्रयागराज करने का निर्णय लिया है

उत्तरप्रदेश सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर पुराना नाम प्रयागराज रखने का फैसला किया है. ऐसी जगह जहां दो नदियों का संगम होता है उसे प्रयाग कहा जाता है. यहाँ गंगा और यमुना नदियाँ हिमालय के विभिन्न हिस्सों से बहकर आती हैं और विभिन्न आध्यात्मिक शक्तियां अपने साथ लाती हैं. दोनों नदियों के मिलन से आध्यात्मिक शक्तिओं का मिलन होता है और ये शक्तियां कई गुना बढ़ जाती हैं. इस प्रकार समझा जा सकता है कि जिस प्रकार दो बहनों का दस वर्ष बाद मिलन हो तो आपस में अपार आनंद की अनुभूति होती है.

बगैर आध्यात्मिक शक्तियों के गंगा और यमुना नदियों का मिलन प्रयागराज में होता है

जापानी वैज्ञानिक मासारू इमोटो ने पानी में बनने वाले क्रिस्टलों का अध्ययन किया है. उन्होंने पाया है कि आध्यात्मिक रूप से चार्ज हुआ पानी बहुत ही सुंदर क्रिस्टलों की स्थापना करता है, जबकि प्रदूषित और रुका हुए पानी से बने क्रिस्टल बहुत बदसूरत होते हैं. पानी आध्यात्मिक शक्तियों से भी परीपूर्ण होता है. इस प्रकार यमुना और गंगा विभिन्न प्रकार की आध्यात्मिक शक्तियां  लाती हैं और इन शक्तियों के मिश्रण से आध्यात्मिक शक्ति बढती है.

नदी के पानी में अध्यात्मिक शक्तियों को वहन करने की क्षमता होती है

झंडे का कोई सैन्य महत्व नहीं होता है लेकिन युद्ध के दौरान झंडे का महत्व बहुत अधिक होता है. यह सभी सैनिकों की ऊर्जा को बढ़ाता है. हम लेडी कामा का सम्मान करते हैं क्योंकि उन्होंने भारतीय ध्वज उठाया, न कि झंडे ने स्वतंत्रता दिलाई. ध्वज देश के लोगों की भावनात्मक शक्ति को बढ़ाता है. इसलिए प्रयागराज नाम बदलना उचित है चूँकि नदियों की आध्यात्मिक शक्ति की तरफ लोगों का ध्यान खींचता है.

सवाल उठाया जा रहा है कि नाम बदल कर सरकार इतिहास को फिर से लिख रही है. मुगल इतिहास को खत्म कर रही है. लेकिन इतिहास लगातार बार बार लिखा जाता रहा है. हिटलर के समय जर्मनों ने एक अलग इतिहास लिखा और वे आज एक अलग इतिहास लिखते हैं. इसलिए इतिहास दुबारा लिखने में कुछ भी गलत नहीं है. इसलिए सरकार द्वारा इलाहबाद का नाम बदलने को हम उचित मानते है. इससे गंगा और यमुना के महत्व पर ध्यान खींचा जा सकेगा.

गंगा का पानी नरोरा में निकाल लिया जाता है इलाहबाद पहुँचने वाला पानी काली नदी का है

प्रश्न है कि क्या गंगा और यमुना वास्तव में आज अपने साथ आध्यात्मिक शक्तियां ला रही हैं? गंगा का पानी आज इलाहाबाद तक नहीं पहुंच रहा है. हरिद्वार, बिजनौर और नरोरा बैराज में सिंचाई के लिए गंगा का लगभग पूरा पानी हटा दिया जाता है. नरोरा के बाद गंगा नदी लगभग सूख गयी है. गंगा से इलाहाबाद में आने वाला पानी वास्तव में काली नदी का पानी है जो नरोरा के बाद गंगा में मिलती है. इसी प्रकार यमुना का पूरा पानी हथिनिकुंड में हटा दिया जाता है. यमुना नदी द्वारा इलाहाबाद में आने वाला पानी वास्तव में चंबल नदी का पानी है जो मथुरा के बाद यमुना में जुड़ती है. हम प्रयागराज नाम इसलिए दे रहे हैं क्योंकिहम मान रहे हैं कि गंगा और यमुना हिमालय से आध्यात्मिक शक्तियों को ला रही हैं. लेकिन वास्तव में वे इस तरह की शक्तियों को नहीं ला पा रही हैं. सर्वप्रथम सरकार को गंगा और यमुना नदियों को हिमालय से इलाहाबाद तक बहाल करना चाहिए था. हरिद्वार, बिजनोर, नरोरा और हथिनिकुंड के बैराजों के डिज़ाइन बदलकर हिमालयी गंगा और यमुना के पानी को प्रयागराज तक पहुँचाना था उसके बाद ही इलाहाबाद का नाम बदल कर प्रयागराज रखना चाहिए था. इसके बाद ही प्रयागराज नाम बदलना सार्थक होगा.


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