लेख


वाराणसी में बाँध निर्माण की वजह से कछुओं पर जीवन संकट

कछुवे नदी के कूड़े को खाकर नदी को स्वच्छ बनाने में मददगार साबित होते हैं .जल मार्ग विकास परियोजना से गंगा नदी को साफ़ करने वाले इन इन कछुवों का अस्तित्व

ही अब खतरे में है .सरकार की जल मार्ग विकास परियोजनाके अंतर्गत वाराणसी में मल्टी मोडल टर्मिनल बनाया जा रहा है. इस टर्मिनल के बनाए जाने से वाराणसी स्थित कछुवा सेंचुरी पर ख़तरा मंडराने लगा लगा है.राजघाट के पास मालवीय पुल से लेकर अस्सी घाट के सामने रामनगर तक के 7 किलोमीटर के दायरे को नेशनल वाइल्ड लाइफ कछुवा सेंचुरी के नाम से सरंक्षित किया गया है. बनाए जा रहे टर्मिनल सेकछुवा सेंचुरी मात्र 1.9 किलोमीटर दूर स्थित है.

निर्माणाधीन टर्मिनल फोटो गंगा टुडे टीम

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने टर्मिनल के पर्यावरण के प्रभावों पर एक रिपोर्ट बनायी है .(आईडब्ल्यूएआई की रिपोर्ट यहाँ उपलब्ध है}. इस रिपोर्ट में कछुवों पर पड़ने वाले मूल दुष्प्रभावों को छिपाया गया है. रिपोर्ट में सिर्फ यह कहा गया है की अगर कछुवे साईट पर आते हैं तो उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा .ऐसा कहना समस्या की अनदेखी करना है. जब जहाज चलेंगे तो कछुओं को उनके शोर, प्रदुषण, आदि से नुक्सान होगा ही. साथ ही रिपोर्ट में कई बातों को नजरअंदाज किया गया है जो बिन्दुवार निम्न है:

१ – टर्मिनल से कछुवों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों पर कहा गया है:

"No movement of tortoise is reported upward to the site. No harm shall be caused to these tortoise in case any tortoise is sited. Necessary caution notice shall be displaced and conveyed to all construction workers and officers"(पेज 27 पैरा 13)

ध्यान से पढ़ें. रिपोर्ट के अनुसार कछुए देखे गए तो उन्हें नुक्सान नहीं किया जायेगा. यदि बिना देखे कछुए समाप्त हो जाते हैं तो परियोजना को कोई मुश्किल नहीं है. कछुओं पर प्रभाव उनके रहने के स्थान के पास शोर आदि से होता है. इसपर रिपोर्ट मौन है.

२ – प्रोजेक्ट में पानी की गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभावों को नहीं बताया गया है सिर्फ वर्तमान स्थिति बताई गई है.(पैरा 1.7).

३ – प्रोजेक्ट से मछलियों पर भी प्रभाव पडेगा लेकिन इस बात पर भी रिपोर्ट में कुछ नहीं बताया गया है. सिर्फ मछली मारने पर रोक लगाने की बात रिपोर्ट में दर्शाई गई है.(पेज 24 पैरा 11)

४ –रिपोर्ट मानती है की प्रोजेक्ट से धुल बढ़ेगी लेकिन इस से जीवजन्तुओ और पक्षियों पर पड़ने वाले दुस्प्रभावो को नहीं बताया गया है. (पेज 17)

हम EIA की रिपोर्ट सलंग्न कर रहे है आप स्वय देखें EIA रिपोर्ट वाराणसी टर्मिनल. ( पेज नंबर 15 से 35 )

       कछुवे पानी में मौजूद कूड़े को खाकर नदी को साफ़ करते हैं. इसी उद्देश्य से कछुवा सेंचुरी में कछुवों को सरंक्षण प्राप्त है लेकिन सरकार की इस योजना के चलते कछुवों के जीवन पर संकट मंडराने लगा है. परिवहन के लिए सरकार के पास विकल्प खुले है सरकार रेल परिवहन को बढ़ावा दे सकती है .

वाराणसी टर्मिनल पर्यायवर्णीय स्वीकृति लिए बिना बनाया जा रहा रहा है जिसके खिलाफ हमने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में वाद दायर किया है. वाद की प्रति यहाँ है.

मोदी जी से विनम्र निवेदन है की ढुलाई के छोटी बचत के लिए कछुओं तथा गंगा को नष्ट होने से बचाएं.


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