लेख


पशुओं का मनुष्य जीवन में अहम् योगदान है. अगर हम इतिहास से लेकर अब तक देखें तो हम पाते हैं कि मनुष्य नें पशुओं को किसी न किसी तरह उपयोग में लिया है. लेकिन आज वे ही पशु जो मनुष्य जीवन के साथ साथ चला करते थे आज मनुष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विलुप्ति की कगार पर पहुँच रहे हैं. पशुओं की इस विलुप्ति के कारण भारत सरकार नें पशुओं को संरक्षण तो दिया है किन्तु अनावश्यक पशुओं का संरक्षण ही आज स्वयं मनुष्य को नुक्सान पहुंचा रहा है.

संरक्षण के प्रति सरकार की नीति:

सरकार ने शेर के संरक्षण के लिए कई कदम उठाये हैं जैसे कि जिम कॉर्बेट और गिर नेशनल पार्क बनाये हैं. शेर आज संकटग्रस्त प्रजाति है. अतः उसके संरक्षण का स्वागत है. इसी क्रम में सुअर और बन्दर को भी संरक्षण दिया जा रहा है. लेकिन शेर और इनकी परिस्थिति में मौलिक अंतर है. शेर मनुष्य को हानि कम पहुंचा रहा है जबकि सूअर और बंदर सृष्टि के लिए हानिप्रद हो गए हैं. इनके द्वारा फसल नष्ट करने से अनाज का उत्पादन कम हो रहा है और मनुष्य का अस्तित्व संकट में पढ़ रहा है. इन पशुओं को संरक्षण देने से सृष्टि की हानि हो रही है.

मछलियों के प्रति कोई संरक्षण नहीं:

हमारे देश में तमाम प्रकार की मछलियां हैं. तटीय क्षेत्र की श्रेष्ठ मछली हिलसा है और पहाड़ी क्षेत्र की श्रेष्ठ मछली माहसीर है. ये दोनों मछलियाँ अंडे देने के लिए नीचे से ऊपर को पलायन करती हैं. ऊपरी क्षेत्र में दिए गए अंडे जब छोटी मछलियों का आकार ले लेती हैं तब यह नीचे बहते हुए पहुचते हैं और नीचे बड़े होते हैं. यह पलायन इनके जीवन का एक अहम हिस्सा होता है. सरकार नें फरक्का बराज बनाकर हिलसा के पलायन को अवरुद्ध कर दिया है और आज हिलसा का जीवन संकट में है. उत्तराखंड के पहाड़ों में चीला, श्रीनगर, टिहरी आदि बाँध बनाकर माहसीर के पलायन को अवरुद्ध कर दिया है जिसके कारण जो माहसीर 80 से 100 किलोग्राम के वजन में पायी जाती थी अब मात्र 1 किलोग्राम वजन में ही रह गयी है.

शेर की तुलना में मछली का संरक्षण ज्यादा जरुरी है क्योंकि यह नदी के पानी को स्वच्छ रखने में मददगार होती है. मछलियाँ नदी में आने वाले आर्गेनिक कूड़े को खाकर पानी को साफ़ कर देती है. सरकार ने गंगा को स्वच्छ करने का जो सराहनीय संकल्प लिया है उसके लिए जरुरी है कि मछलियों का संरक्षण किया जाय. लेकिन फरक्का बराज बनाकर और हाइड्रोपावर को बढ़ावा देकर सरकार उसी मछली को विलुप्त कर रही है जो कि मनुष्य के लिए लाभप्रद है.

शेर, बन्दर और मछली का 5 बिन्दुओ पर तुलनात्मक अध्ययन:

  • पर्यावरण: पर्यावरण की दृष्टि से बन्दर और शेर का कोई लाभ नहीं है किन्तु नदियों और समुद्रों में जल को साफ़ रखने के लिए मछलियों का महत्वपूर्ण योगदान है, अतः मछलियाँ पर्यावरण की दृष्टि से लाभकारी हैं.
  • आर्थिक: बंदरों और शेरों का विशेष आर्थिक योगदान नहीं है. बल्कि फसल को नष्ट करके बन्दर आर्थिक हानि पंहुचा रहे हैं. किन्तु आर्थिक विकास में मछली के व्यवसाय का सार्थक प्रभाव होता है.
  • मनोरंजन: सौन्दर्य और फोटोग्राफी की दृष्टि से बंदरों का ज्यादा महत्त्व नहीं दिखता है जबकि शेर और मछलियों का अधिक महत्त्व होता है. तमाम पर्यटक डालफिन जैसी मछलियों एवं शेर को देखने को उत्सुक रहते हैं.
  • जीन संरक्षण: बंदरों के जीन संरक्षण की जरुरत नहीं है जबकि शेर और मछलियों का जीन संरक्षण करना जरुरी होता है.
  • सामाजिक प्रभाव: बंदरों का समाज में नकारात्मक महत्त्व है, शेर का सामाजिक महत्व शुन्य है, लेकिन मछलियों का बड़ा सामाजिक महत्त्व होता है. बहुत से लोग मछलियाँ पकड़ कर अपनी जीविका चलाते हैं.

इस तुलनात्मक अध्ययन को हम सारणी क्रम में नीचे देख सकते हैं:

 तुलनात्मक अध्ययन  बन्दर  शेर  मछली
 पर्यावरण  × ×
 आर्थिक प्रभाव  × ×
 मनोरंजन ×  
 जीनपूल ×
 सामाजिक महत्त्व × ×

उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि मछली को संरक्षण देना सबसे ज्यादा जरुरी है जबकि बन्दर को नुकसानदेह सरकार नें शेर को संरक्षण दिया है हम उसका स्वागत करते हैं. किन्तु प्रश्न है कि मछलियाँ, जो कि हमारे लिए हर प्रकार से लाभप्रद है, उन्हें हम क्यों मार रहे हैं और बन्दर और सुअर जो कि हमारे लिए अनुपयुक्त हैं उन्हें हम क्यों बचा रहे हैं? हम मनुष्य के विकास पर दोहरी मार अनायास ही क्यों मार रहे हैं?

बंदर जैसे अनुपयुक्त पशुओं का किसानो को शिकार करने की छूट देनी चाहिए जिससे कि वे अपनी फसल को बर्बाद होने से बचा सकें. साथ ही पहाड़ों में जलविद्युत परियोजनाओं को हटाकर मछलियों का संरक्षण करना चाहिए.

 

इस विषय पर प्रधानमंत्री जी को लिखें

 


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