लेख


देश की जनता में उत्साह है कि शहरों में प्लास्टिक का इस्तेमाल होना बंद हो रहा है. मान्यता है कि प्लास्टिक पर्यावरण के लिए हानिप्रद है. वह जल्दी से ख़त्म नहीं होता है. उसको पूरी तरह समाप्त होने में चार सौ से एक हज़ार वर्ष तक का समय लग जाता है. इस समस्या से निजाद पाने के लिए सरकार ने गुटखा, पान मसाला आदि पर  प्लास्टिक के पैकेटों पर प्रतिबन्ध लगाया है.

लेकिन प्लास्टिक का उपयोग कम करने के कारण अब दुकानदार कपड़े अथवा कागज़ के थैलों का उपयोग कर रहे हैं. प्रश्न यह है कि क्या कपडे अथवा कागज़ से बने यह थैले पर्यावरण के लिए उपयुक्त हैं?

 

प्लास्टिक और कागज का तुलनात्मक अध्ययन

उत्तरी आयरलैंड की सरकार द्वारा प्लास्टिक बैग और कागज़ के बैगों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया (रिपोर्ट यहाँ देखें). इस रिपोर्ट में बताया गया है कि:

  • प्लास्टिक बैगों की तुलना में कागज़ से बने बैगों के उत्पादन में ऊर्जा ज्यादा लगती है, ग्रीनहाउस गैसें ज्यादा निकलती हैं और पानी का उपयोग बहुत ज़्यादा होता है जैसा नीचे चित्र 2 में दिया गया है.

  • ग्लोबल वार्मिंग का महत्वपूर्ण कारण ओजोन गैस का उत्सर्जन है. प्लास्टिक बैगों की तुलना में कागज़ के थैलों के उत्पादन में ओजोन का उत्सर्जन तीस प्रतिशत अधिक होता है.
  • नीचे चित्र 4 में हम देख सकते हैं कि कागज़ का कूड़ा जब नदियों और तालाबों में जाता है तो प्लास्टिक की तुलना में पानी में निहित ऑक्सीजन का चौदह गुना ज्यादा इस्तेमाल करता है जिससे जलीय जीवों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है. तुलना में प्लास्टिक, तालाब के ऑक्सीजन को नहीं सोखता है.

  • प्लास्टिक की तुलना में कागज़ के थैले का वज़न लगभग चार गुना होता है. नीचे चित्र 5 में कागज़ के थैले का वजन 18 मिलीग्राम है जबकि प्लास्टिक के थैले का वजन 4 मिलीग्राम है.अतः प्लास्टिक की तुलना में कागज़ हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर ज़्यादा भारी पड़ता है.

उपरोक्त इन सभी बिन्दुओं पर कागज़ के थैले प्लास्टिक की तुलना में ज्यादा हानिप्रद हैं. प्लास्टिक का एक मात्र लाभ यह है कि कूड़े की तरह फेंकने पर प्लास्टिक का थैला समाप्त नहीं होता है जबकि कागज़ का थैला जल्दी सड़ कर के पर्यावरण में घुल-मिल जाता है.अतः कागज़ के थैलों का समग्र पर्यावरणीय प्रभाव प्लास्टिक के थैलों से बहुत अधिक है.

 

प्लास्टिक का पुनः इस्तेमाल

प्लास्टिक के उपयोग की एक मात्र समस्या कूड़े की है. इसे पुनरुपयोग या रीसायकल कर के इस समस्या से बचा जा सकता है. अतः हमको प्लास्टिक के थैलों का उपयोग बढाकर इनके रीसायकल करने पर ध्यान देना चाहिए जैसा नीचे चित्र 6 में दिखाया गया है.

हमारे देश में लाखों लोग सड़कों एवं रेलवे लाइनों के बगल में फेंके हुए प्लास्टिक के थैलों इत्यादि को बटोरते हुए दिखते हैं. इनको सम्मान देना चाहिए और इनके लिए समुचित व्यवस्था करनी चाहिए. लोगों द्वारा प्लास्टिक के थैलों को सडकों और रेलवे लाइनों के किनारे फेंके जाने का मुख्य कारण यह है कि कूड़ेदानो की समुचित व्यवस्था नहीं होती है. मजबूरन लोगों को प्लास्टिक के थैले खुले में फैंकने पड़ते हैं. अतः हमें कूड़ेदानों की उचित व्यवस्था करनी चाहिए. केंद्र सरकार नें नगर पालिकाओं को इस प्रकार की व्यवस्था के लिए आदेश पारित किये हैं परन्तु धन न होने के कारण नगरपालिकाओं के लिए इस कार्य को करना कठिन है. अतः हमको प्लास्टिक के थैलों पर टेक्स लगाना चाहिए और उस रकम से प्लास्टिक को रीसायकल करने की उचित व्यवस्था करनी चाहिए.

हमारा सभी नागरिकों से आग्रह है कि प्लास्टिक के थैलों का बहिष्कार करने के स्थान पर इनको रीसायकल करने पर ध्यान दें.

यह पोस्ट डॉ भरत झुनझुनवाला, देबादित्यो सिन्हा, स्वामी शांतिधर्मानंद और विमल भाई द्वारा समर्थित है.

 

 

इस विषय पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को लिखें


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