लेख


जब नर्मदा नदी में पानी ही नहीं तो सरदार सरोवर की जरुरत क्यों ?

गुजरात में पानी का संकट गहरा रहा है. नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बाँध में पानी कम होने की वजह से सरकार ने ऐलान किया है कि मार्च के बाद किसानों को सिंचाई के लिए नर्मदा का पानी नहीं दिया जायेगा. इससे स्पष्ट होता है कि नर्मदा में पर्याप्त पानी नहीं है.

वस्तुस्थिति यह है कि सरदार सरोवर से गुजरात को ग्यारह अरब क्यूबिक मीटर पानी मिल रहा है. इस पानी से कच्छ का 2 प्रतिशत और सौराष्ट्र का 10 प्रतिशत क्षेत्र ही सिंचित होता है. शेष 98 प्रतिशत कच्छ और 90 प्रतिशत सौराष्ट्र की भूमि पर नर्मदा का पानी नहीं पहुंचेगा.

नर्मदा के पानी को कच्छ और सौराष्ट्र तक पाइपलाइन के माध्यम से ले जाया जाता है

वर्तमान में सरकार का ध्यान पूरी तरह से नर्मदा के पानी को गुजरात में लाने की तरफ है. फलस्वरूप 98 प्रतिशत कच्छ एवं 90 प्रतिशत सौराष्ट्र के प्रति सरकार उदासीन है. नर्मदा का पानी आ जाए तो भी इस बड़े भूभाग को लाभ नहीं होगा.

नर्मदा के पानी के प्रति सरकार का इतना रुझान है कि पानी के क्षेत्र में अधिकतम खर्च, नर्मदा के पानी के वितरण में लग रहा है. नतीजा यह है कि 98 प्रतिशत कच्छ और 90 प्रतिशत सौराष्ट्र पर जो वर्षा का पानी गिर रहा है उसके जल भरण से जो खेती का विकास हो सकता है उसके ऊपर से ध्यान हट गया है. सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेडद्वारा मौजूदा रिपोर्ट(पेज 18) के अनुसार सौराष्ट्र और कच्छ में नर्मदा से 9 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलता है जबकि इस क्षेत्र में 17 बिलियन क्यूबिक मीटर वर्षा होती है. 9 बीसीएम से 2 या 10 प्रतिशत भूमि की सिंचाई करने के फेर में हम 17 बीसीम से 98 या 90 प्रतिशत भूमि की सिंचाई पर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

तमाम प्रयोग किये गए हैं जिनसे यह सिद्ध होता है कि वर्षा के पानी को चेक डैम के माध्यम से रोक कर भूजल का पुनर्भरण करने से सिंचाई का पर्याप्त विकास होता है. इस संदर्भ में रिपोर्ट (1,2,3) के अंश दिए जा रहे हैं.

"Today, I sow groundnuts in June, tur and wheat as winter crops and cultivate oilseeds in summers. I could not imagine farming in summers. There were days when we hardly farmed six months. Since the check dam initiative, we are working round the year."(Report 1)

“Villagers of Mandlikpur have benefited from well water recharging and check dams. In 1993, this village began recharging its 150-odd wells.” (Report 2)

“As a result of the check dam building, the river in saurashtra has been regenerated. Today, water is seen in the river through out year including the lean months and the river flow is observed in almost nine months.” (Report 3)

वर्षा के जल को चेक डैम और प्लास्टिक तालाब बनाकर भविष्य के लिए संरक्षित किया जा सकता है.

थोड़े से क्षेत्र में नर्मदा के पानी को लाने पर सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है जबकि यह पानी भी कम हो रहा है और मार्च के बाद किसानों को यह नहीं मिलेगा; और बड़े क्षेत्र में वर्षा के जल भरण पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है. नतीजा यह है कि जो पैसा हमने नर्मदा के पानी को लाने में लगाया है वह निष्फल है क्योंकि नर्मदा में पानी ही नहीं है और जो पानी हमारे पास वर्षा में बरस रहा है उसे हम भूजल पुनर्भरण के लिए ध्यान नहीं दे रहे हैं.

सच यह है कि पूरे देश में नदियों के कैचमेंट में जितना पानी आता है उससे कई गुना ज्यादा पानी मैदानी क्षेत्रों में वर्षा के माध्यम से गिरता है, लेकिन हम मैदानी क्षेत्रों में बरसते हुए पानी के प्रति कम  सोचते हैं. कारण यह दिखता है कि इसमें बड़े प्रोजेक्ट नहीं होते हैं अतः बड़े ठेकेदारों को पैसा नहीं मिल पाता है इसलिए इसकी तरफ सरकार का ध्यान जाता ही नहीं है. दूसरी तरफ नदियों में जहाँ पानी ही नहीं है उसके उपयोग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है सिर्फ इसलिए कि वहां बड़े प्रोजेक्ट होते हैं और बड़े ठेकेदारों को बड़ा फ़ायदा होता है.

अतः सरकार को निजी स्वार्थ देखते हुए नर्मदा के पानी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और वर्षा के जल के संग्रहण पर ध्यान देना चाहिए.

 


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