लेख


पोस्ट: हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा डॉ भरत झुनझुनवाला

भागलपुर के निकट गंगा को गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के लिए वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित किया गया है. इस जानवर में आँखें नहीं होती हैं यह अन्य समुद्री जीवों की ध्वनि वातावरण द्वारा विचरण करता है और अपने शिकार को पकड़ता है.

बीते दिनों में, केंद्र ने राष्ट्रीय जलमार्ग -1 (एनडब्ल्यू -1) के हल्दिया-वाराणसी पर बढ़ते नेविगेशन के लिए 5,369 करोड़ रुपये जल विकास मार्ग परियोजना को मंजूरी दे दी. इस परियोजना की 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है. केंद्र सरकार के अनुसार तब परिवहन का एक वैकल्पिक तरीका उपलब्ध होगा जो कि पर्यावरण के अनुकूल होगा और लागत कम आएगी. यह आर्थिक आकलन  केवल बार्जेस चलाने और टर्मिनलों को बनाए रखने की लागत का संज्ञान लेता है. किन्तु यह समाज पर लगाए गए पर्यावरणीय लागतों के मौद्रिक मूल्य का संज्ञान नहीं लेता है.

 

जलमार्ग परियोजना के पर्यावरणीय दुष्प्रभाव

यदि पर्यावरण के नुकसान का आर्थिक मूल्य जोड़ दिया जाये तो हमारे आंकलन में यह परियोजना लाभप्रद नहीं रह जायेगी. जलमार्ग परियोजना के निम्नलिखित पर्यावरणीय दुष्प्रभाव के केंद्रसरकार ने अनदेखी की है.

पहला दुष्प्रभाव जलमार्ग के लिए की गयी ड्रेजिंग का पड़ता है. गंगा नदी छिछले तालाबों और उथले क्षेत्रों पर फैली हुई बहती है। मछली और कछुए इन उथले क्षेत्रों में अंडे देते हैं। लेकिन ड्रेजिंग से नदी का बहाव एक गहरे चैनल में सीमित कर दिया गया है. अब उथले इलाकों में मछली और कछुए के निवास स्थान को नष्ट कर दिया गया है.

जलमार्ग का दूसरा प्रभाव जहाज़ों के कछुओ पर अघात से पड़ता है. जब जहाज चलते हैं तो कछुए उनके रास्ते से भाग नहीं पाते क्योंकि वे धीरे धीरे चलते हैं, और चोटिल हो जाते हैं.  वाराणसी के निकट गंगा में कछुआ अभयारण्य स्थापित किया गया है. अन्य देशों में अध्ययन से संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में नावों से कछुओं का शिकार होता है.

जलमार्ग का तीसरा दुष्प्रभाव जहाजों के चलने से निकली आवाज से होता है.भागलपुर के निकट गंगा में डॉल्फिन के संरक्षण के लिए  वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित किया गया है. इस जानवर में आँखें नहीं होती हैं. यह जानवर अन्य समुद्री जीवों की आवाजाही के द्वारा उत्पन्न ध्वनि से ही अपना शिकार पकड़ता है. बड़े बार्जेस के चलते इस क्षेत्र में ऊंची ध्वनि पैदा होगी जिससे उनके लिए शिकार को पकड़ना मुश्किल हो जाएगा.

जलमार्ग का चौथा दुष्प्रभाव प्रदुषण में वृद्धि का होगा.जहाजों और बार्जेस पर लगा पेंट भी पानी दूषित करता है। जहाजों द्वारा छोड़े गए कार्बन डाइऑक्साइड को नदी द्वारा निकटता की वजह से अधिक सोखा जाएगा और यह नदी को प्रदूषित करेगा.

अमेरिका स्थित एग्रीकल्चर एंड ट्रेड पालिसी इंस्टिट्यूट द्वारा एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मिसिसिपी जलमार्ग केवल इसलिए किफायती है क्योंकि इस पर टैक्स वसूला जाता है जबकि रेल और सड़क परिवहन से टैक्स वसूला जाता है. एनडब्ल्यू -1 इससे भिन्न नहीं होगा. पर्यावरण के नुक्सान के मूल्य को जोड़ लिया जाय तो यह देश के लिए अत्यधिक नुकसानदेह सिद्ध होगा.

 

इस विषय पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को लिखें

 


Comments powered by CComment

ट्विट्टर पर जुडें

फेसबुक पर जुडें

गूगल प्लस से जुडें