लेख


 

साबरमती पर धरोई बाँध बनने से नदी सूख गयी थी जिसमे कि अब नर्मदा का पानी डाला जा रहा है (फोटो साभार: गुरुप्रसाद)
साबरमती नदी का पानी पूर्व में अहमदाबाद तक बहता था. बीते समय में इस पर धरोई बांध बना दिया गया. इसके बाद धरोई से नीचे अहमदाबाद तक साबरमती नदी सुख गयी है.अब इस नदी को जीवित करने के लिए इसमें नर्मदा नदी का पानी डाला जा रहा है. साबरमती के सूखने का दूसरा कारण भूजल का अतिदोहन है. सामान्य रूप से नदी के नीचे की ज़मीन में नमी बनी रहती है, जिससे नदी का पानी नदी के चैनल में टीका रहता है. बीते समय में साबरमती नदी के आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में टूयूबवेल खोदे गए हैं और नदी के नीचे की ज़मीन में नमी कम हो गयी है. नीचे की ज़मीन सूख जाने से साबरमती का पानी भर-भराकर ज़मीन में रिस जाता है और नदी सूख जाती है.    

एक रिपोर्ट कहती है:

सूखा पड़ना और नदी की पानी की गुणवत्ता में गिरावट, प्राकृतिक कारणों के कारण होती है जैसे कि जलवायु, तापमान, बारिश और मिट्टी की बनावट की वजह से. लेकिन ये प्राकृतिक कारण भी मानव निर्मित कारणों से ही होते हैं. जैसे कि भूजल के अतिदोहन  और वनों की कटाई के कारण.रिपोर्ट यहाँ उपलब्ध है.

नर्मदा से साबरमती को जीवनदान

पहले तो हमने साबरमती से जल निकाल कर नदी को जलविहीन कर दिया, फिर नर्मदा नदी से पानी निकालकर साबरमती नदी में डाल दिया. अतः अब साबरमती नदी  में पानी तो है, लेकिन यह साबरमती का पानी नहीं अपितु नर्मदा का पानी है. नर्मदा का पानी साबरमती को देने की वजह से नर्मदा में पानी कम रह गया है इससे नर्मदा नदी का अस्तित्व खतरे में है. इसलिए, नर्मदा को दाव पर लगाकर साबरमती को पुनर्जीवित करना सरकार की अच्छी उपलब्धि नहीं है.

धरोई बाँध की वजह से साबरमती नदी का पानी सूख चुका है

हर नदी एक विशेष प्रकार की मछलियों के लिए एक आवास होती है, विशेष प्रकार के पौधों और पेड़ों का घर होती है, जो अपने प्राकृतिक परिस्थितियों में पनपते हैं. नदी का सही विकास उसकी अस्मिता एवं विशेषता को पहचानना और उसका सम्मान करना है.

एक नदी से जल निकाल कर दूसरी नदी में डालना इस प्रकार माना जा सकता है कि पहले एक स्वस्थ व्यक्ति का खून निकालकर उसे बीमार किया जाये, और फिर बाद में दूसरे व्यक्ति का रक्त उसे देकर स्वस्थ करने की कोशिश की जाए .

साबरमती और नर्मदा को बचाने के संभव प्रयास

नर्मदा का जल साबरमती में डालने के बजाये हमें धरोई बाँध को हटाना चाहिए जिससे कि साबरमती का पानी अविरलता से बहता रहे और नर्मदा नदी में भी पानी कम न हो. हमें कृषि में पारंपरिक जल संचयन विधियों को पुनर्जीवित करना चाहिए. साबरमती के आसपास के क्षेत्रों में वर्षा के पानी को खेतो में मेंड बनाकर अथवा बरसाती नालो में चेकडैम बनाकर रोका जा सकता है. इससे यह पानी ज़मीन में रिसेगा और बाद में सिंचाई के लिए निकाला जायेगा. हमें साबरमती के पानी की अत्यधिक जल खपत को रोकना चाहिए. अधिक पानी की खपत करने वाली फसलों जैसे कपास, केला, अंगूर और गन्ने के उत्पादन पर इस क्षेत्र में प्रतिबंध लगा देना चाहिए.

हमें साबरमती के पानी की अत्यधिक जल खपत को रोकना चाहिए. नर्मदा जल से साबरमती को पुनर्जीवित करने के बजाए, हमें गुजरात में सिंचाई के लिए नर्मदा जल का सीधे उपयोग करना चाहिए ,जिससे एक नदी को जीवित करने के लिए दूसरी नदी की हत्या न करनी पड़े.

 

आपसे निवेदन है कि पोस्ट पढ़कर नीचे अपना कमेंट/सुझाव आवश्य दें.


Comments powered by CComment

ट्विट्टर पर जुडें

फेसबुक पर जुडें

गूगल प्लस से जुडें