लेख


नितिन गडकरी ने 150 प्रोजेक्ट्स की शुरुवात की

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गंगा की सफाई हेतु मार्च 2018 तक 150 नए प्रोजेक्ट स्थापित करने की बात कही है. इसके अंतर्गत 90 प्रोजेक्टों को स्वीकृति दी जा चुकी है और अन्य को भी जल्दी स्वीकृत कर दिया जायेगा. हम गडकरी जी के इस फैसले का समर्थन करते हैं. सरकार का मानना है कि 1.5 लाख करोड़ रुपयों की लागत से बनने वाले ये प्रोजेक्ट गंगा की सफाई में मददगार होंगे. लेकिन गडकरी जी साथ साथ गंगा पर बड़े जहाजों को चलाना चाहते हैं इनसे गंगा प्रदूषित होगी. नीचे चित्र में दिखाया गया है कि जहाजों के पेंट में तांबा होता है जो कि मछलियों  के लिए हानिकारक होता है.

 

बोट पेंट्स, जो पतवार पर जमा होने से सामग्री को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है.(इस प्रक्रिया को फोउलिंग कहा जाता है)

गंगा की सफाई में सर्वाधिक मददगार जलीय जीव जैसे कि कछुए, मछलियाँ, कालिफाज़ इत्यादि होते हैं जो कि गंगा में रह कर गंगा की सभी जैविक – अजैविक कूड़ा, कचरा और गन्दगी को खा कर नदी को साफ़ कर देते हैं. जलमार्गों के निर्माण के कारण जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण भी बढ़ने लगा है.(रिपोर्ट यहाँ पर देख सकते हैं – पैरा 1). इस प्रदूषण से ये जलीय जीव प्रभावित होते हैं. इन पोतों के आवागमन से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है जिसकी वजह से गंगेज डॉलफिन संचार करने में असमर्थ होते हैं.  

श्री गडकरी जी ने अपने भाषण में कहा “वर्तमान में केवल 5 अंतर्देशीय जलमार्ग हैं और उनकी सरकार ने 106 अन्य की पहचान कर ली है और अब इन 111 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है. (पूरी स्पीच आप यहाँ देख सकते हैं.) यानी गंगा के साथ  साथ  श्री  गडकरी  देश की सभी  नदियों को नष्ट कर देना चाहते हैं .

अपनी पूरी स्पीच में श्री गडकरी जी ने पर्यावरण और गंगा पर इन जलमार्गों के नकारात्मक प्रभावों की कोई चर्चा नहीं की . सरकार द्वारा चलाये जा रहे इन सफाई प्रक्रियाओं की तुलना में इस तरह के नकारात्मक प्रभाव बहुत अधिक विनाश करेंगे. क्या इन परियोजनाओं को यथावत रखकर गंगा को साफ़ किया जा सकता है ?


 


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