लेख


आदी गुरु शंकराचार्य गंगा अष्टकम में गंगा के बारे में लिखा है:

आप (गंगा) गुफाओं और स्वर्ण पर्वत से गुजरते हो कृपया हमें शुद्ध करें .. आपके किनारे से पानी सुबह और शाम को कुशा घास और महान ऋषि द्वारा चढ़ाए गए फूलों द्वारा शोभित होते हैं. यदि आपकी तरंगों की एक झलक कोई देख लेता है, तो उसके पाप नष्ट हो जाते हैं (गंगाष्टम).

गंगा हमारे पापों को मारती है, इसलिए यह कहा गया है कि गंगा में स्नान करके मुक्ति प्राप्त की जा सकती है, जिसे तपस्या, ब्रह्मचर्य और बलिदान से भी प्राप्त नहीं किया जा सकता है. (महाभारत, अनुशासन पर्व 27.27)

गंगा स्नान से कई फायदे होते हैं जैसे दर्द को दूर करना, पापों को दूर करना, इच्छाओं की पूर्ति (महाभारत, अनुशासन पर्व 27.32, 27.43, 27.65); और पिछले कर्मों के प्रभावों  को हटाना (ब्रह्मा-वैवर्त पुराण 10.28-29, 10.137)

लेकिन जलविद्युत परियोजनाओं की वजह से गंगा इन परियोजनाओं की सुरंग और टर्बाइन के बीच बह रही है. विष्णुप्रयाग में गंगा सुरंगों में बहती है जिसके कारण कुश घास और फूल गंगा के किनारे नहीं देखे जाते हैं. टिहरी और श्रीनगर जैसी परियोजनाओं के जलाशयों के कारण  गंगा की लहरें भी देखने को नहीं मिलती है. अतः जो गंगा की बुनियादी शक्ति थी जिनका वर्णन आदि शंकराचार्य और महाभारत में किया गया है उसको इन परियोजनाओं द्वारा नष्ट किया जा रहा है.

श्रीनगर परियोजना में नहर के माध्यम से नदी से पानी निकाला जाता है

देवप्रयाग , ऋषिकेश और हरिद्वार में तीर्थ यात्रियों का सर्वेक्षण कराया गया जो यह पुष्टि करता है कि टिहरी बाँध से पहले पानी की गुणवत्ता बेहतर थी.

तालिका: टिहरी बांध के निर्माण से पहले तीर्थयात्री रिपोर्टिंग पानी बेहतर था.

 

Sl No

Type of Pilgrim

Number of Pilgrims surveyed

Net, percent

 

1

Dev Prayag

41

76%

 

2

Rishikesh

87

32%

 

3

Haridwar

78

12%

       

एनडीए सरकार आदि शंकराचार्य और महाभारत द्वारा वर्णित गंगा के सार को मार रही है.


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