लेख


श्रीपद धर्माधिकारी एवं सिन्धभोर द्वारा लिखित

भारत सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय अंतर्देशीय जलमार्गों की एक महत्वकांक्षी परियोजना को हाथ में लिया है. मंथन और श्रुति की नई रिपोर्ट अंतर्देशीय जलमार्गों से संबंधित मुद्दों की विस्तृत विवेचना प्रस्तुत करती है.  राष्ट्रीय जलमार्गों के निर्माण से देश को अनेक फायदे होंगे. किन्तु निर्माण के चरण में पड़ने वाले दुष्प्रभावों को नीचे दर्शाया गया हैं:

  1. जब किसी नदी में नौवहन मार्ग बनाया जाता है तो अपेक्षित गहराई और चौड़ाई बनाने के लिए नदी में ड्रेजिंग की जाती है, जिससे की जलीय जीवन नष्ट होने की सम्भावना रहती है.
  2. ड्रेजिंग के दौरान नदी की तली से गाद, चट्टानों, गारे और कीचड़ को निकला जाता है. इस तरह की कार्यवाही से नदी की स्थिरता व संतुलन पर असर पड़ता है.
  3. किसी भी तरह की ड्रेजिंग के दौरान नदी का पानी गन्दा हो जाता है. इस गंदे पानी की वजह से बहुत सारी मछलियाँ वहां से पलायन कर जाती हैं. गंदे पानी की वजह से सूरज की किरणे भीतर तक नहीं जा पाती हैं जलीय पौधों और जलीय जंतुओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
  4. जलमार्ग बनाने के लिए नदियों की तली को काटा जाता है तो भूमिगत जलश्रोतों के कटने की सम्भावना भी ज्यादा बढ़ जाती है. इसकी वजह से आसपास के कुओं और झरनों में पानी की आपूर्ति बंद हो जाएगी और आसपास का भूमिगत जल स्टार भी घटने लगेगा.
  5. नदियों की खाड़ियों और क्रिक्स में ड्रेजिंग के फलस्वरूप पानी के निकासी के कारण समुद्र का खारा पानी क्रिक्स या नदियों में काफी भीतर तक घुस सकता है. पानी के इस तरह से घुसने की वजह से खाड़ी में मौजूद जंगलों, मछलियों एवं जलीय जीवों पर सीधा प्रभाव पड़ना निश्चित है.
  6. जलमार्गों से पदार्थों की ढुलाई और परिवहन के लिए नदी तटों पर बंदरगाह और हब बनाने होंगे जिससे कि आसपास के पेड़ों और मैनग्रोव जंगलों की बड़े पैमाने पर कटाई होगी. और घाटों और बंदरगाहों के निर्माण से नदी, स्थानीय लोग और मछुआरे की पहुँच से बाहर हो जाएगी.

धर्म्तर पोर्ट

धरमतर पोर्ट की जेटी पर चालू एस्केवेटर जिसके पीछे विशाल कोयले के भण्डार को साफ़ देखा जा सकता है (फोटो साभार: मंथन और श्रुति)

धरमतर क्रीक पर लगाया गया बैकहो ड्रेजर
धरमतर क्रीक पर लगाया गया बैकहो ड्रेजर (फोटो साभार: मंथन और श्रुति)

अतः हमारा वर्तमान सरकार से यह प्रश्न है कि इस बहुद्देशीय विकास से होने वाले फायदों की वजह से मनुष्य के आम जीवन और नदियों को क्यूँ संकट डाला जा रहा है. इस प्रकार के बहुद्देशीय प्रोजेक्टों को चलाने से पहले दुष्प्रभावों का हल निकलना बहुत जरुरी है.

अंत में बताते चलें कि:

राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 में 111 राष्ट्रीय जलमार्गों का ब्यौरा दिया गया है जिसके अनुसार राष्ट्रीय जलमार्ग भारत की लगभग सभी प्रमुख नदियों से होकर गुज़रते हैं. नीचे हम क्रमानुसार विभिन्न राज्यों में प्रस्तावित जलमार्गों की संख्या को देख सकते हैं:

1 अगस्त 2016 को पॉट परवहन मंत्रालय द्वारा प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो के माध्यम से जारी की गयी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक भारत में 6 राष्ट्रीय जलमार्ग कार्यरत हैं:

  1. राष्ट्रीय जलमार्ग 1: गंगा भागीरथी हुगली नदी व्यवस्था (इलाहाबाद- हल्दिया).
  2. राष्ट्रीय जलमार्ग 2: ब्रह्मपुत्र नदी.
  3. राष्ट्रीय जलमार्ग 3: पश्चिमी तट नहर (कोत्त्पुरम-कोल्लम) एवं उद्योगमंडल एवं चम्प्कारा नहरें.
  4. राष्ट्रीय जलमार्ग 68: मांडोवी नदी.
  5. राष्ट्रीय जलमार्ग 97: सुंदरवन जलमार्ग.
  6. राष्ट्रीय जलमार्ग 111: जुआरी नदी.

 लेखक मंथन अध्ययन केंद्र से जुड़े पर्यवारंविद्ध हैं . 


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